छत्तीसगढ़ में आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच यूनिसेफ की एक रिपोर्ट आई है। यूनिसेफ ने छत्तीसगढ़ में नवजात शिशुओं को सही देखभाल न होने के कारण जन्म के 28 दिनों के भीतर 18000 बच्चों की मौत हर साल होने का दावा किया है। यूनिसेफ ने इस रिपोर्ट को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 के आधार पर तैयार किया है। कवर्धा में हुई स्टेट लेवल मीडिया वर्कशॉप में रिपोर्ट यूनिसेफ के छत्तीसगढ़ प्रमुख जॉब जकारिया ने इस रिपोर्ट को पेश किया।
बातचीत के दौरान जॉब जकारिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सालाना हजारों नवजात बच्चों की मौत पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती जबकि केरल में एक नवजात बच्चे की मौत पर सियासी हंगामा खड़ा हो जाता है। उन्होंने बताया कि वह पिछले कुछ सालों से केरल में नवजात शिशुओं और महिलाओं की सेहत को लेकर जागरुकता पर काम कर रहे थे।
जॉब ने रिपोर्ट में दावा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ 32% माताएं ही बच्चों को जन्म के 1 घंटे बाद स्तनपान करा पाती हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में अक्सर बच्चों को जन्म के फौरन बाद मां से अलग निगरानी में रखा जाता है, इसलिए सही समय पर स्तनपान नहीं हो पाता। जबकि जन्म के एक घंटे के भीतर होने वाला स्तनपान बच्चों के सही पोषण और विकास के लिए बेहद जरूरी है। यूनिसेफ इसको लेकर लगातार जागरुकता कार्यक्रम चला रहा है।
यूनिसेफ की रिपोर्ट के साथ ही एनएफएचएस-5 रिपोर्ट के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में 13 प्रतिशत बच्चे जन्म के समय ढ़ाई किलो से भी कम वजन के होते हैं। साथ ही 26000 बच्चों की मौत एक साल के अंदर ही हो जाती है। एनएफएचएस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सिर्फ 10% बच्चों को ही पर्याप्त भोजन मिल रहा है, प्रदेश में 5 साल से कम उम्र की का 30% बच्चों का वजन कम है और 35% बच्चे बौने हैं, प्रदेश में 10 लाख बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन कम है।
यूनिसेफ और एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट पर राज्य सरकार की अलग ही दलील है। भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का कहना है कि एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट पिछली रिपोर्ट की अपेक्षा बेहतर है। एनएफएचएस-5 में कहा गया है कि साल 2015-16 की तुलना में साल 2020-21 में छत्तीसगढ़ में नवजात बच्चों की मृत्यु दर, शिशुओं की मृत्यु दर और पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। एनएफएचएस-5 में एनएफएचएस-4 की तुलना में पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर में 22 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बता दें कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 वर्ष 2015-16 में किया गया था।
भूपेश सरकार का कहना है कि संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के 5 मेडिकल कालेज,21 जिला अस्पतालों में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना की गई है, जिनकी नियमित मॉनिटरिंग एम्स रायपुर के विशेषज्ञ करते हैं।