उत्तराखंड का साल 2016 सियासी गहमा गहमी के बीच गुजरा। साल 2017 की दस्तक के साथ राज्य में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया। प्रदेश में सियासत की गर्मी का इस वक्त जोरो पर है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही के लिए यहां के परिणाम काफी महत्वपूर्ण है। राज्य में कुछ चेहरे ऐसे है जिनके साथ पार्टी की साख भी जुड़ी हुई है। जानें इन खास शख्सियतों के बारे में...
हरीश रावत
उत्तराखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत इस बार के विधानसभा चुनाव मेें किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। सीएम हरीश खुद शह मात के खेल में फंसे हैं। खुद को खांटी पहाड़ी कहने वाले हरीश रावत मैदानी क्षेत्र की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे है। हरीश रावत के राजनीतिक कौशल से कांग्रेस मुकाबले में तो है लेकिन सत्ता वापसी की चुनौती के अलावा अपने गढ़ कुमाऊं में खुद को साबित करने की परीक्षा में भी पासिंग मार्क्स से काम नहीं चलेगा।
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इंदिरा हृदयेश
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इंदिरा हृदयेश
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस की ही नहीं बल्कि राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ हैं, जो अपने दम पर सियासत करती है। चुनाव जीत और संख्याबल बहुमत की कसौटी पर खरा उतरा तो वह मुख्यमंत्री के पद की दावेदार होंगी और चुनाव हार गईं तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा। इंदिरा हल्द्वानी सीट से चुनावी मैदान में हैं।
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प्रीतम सिंह
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प्रीतम सिंह
पार्टी - कांग्रेस
विधानसभा सीट - चकराता
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में है। चकराता क्षेत्र में मंदिर में दलितों को प्रवेश करने से रोकने का मामला उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
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किशोर उपाध्याय
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किशोर उपाध्याय
विधानसभा सीट - सहसपुर
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और दिग्गज नेता किशोर उपाध्याय सहसपुर से चुनावी मैदान में हैं। 2002 और 2007 में टिहरी विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे, लेकिन 2012 का चुनाव उनके लिए खास नहीं रहा। इस बार उनका मुकाबला उन्हीं की पार्टी के बागी अर्येंद्र शर्मा से है। ऐसे में खुद की प्रतिष्ठा बचाना उनके लिए जरूरी है।
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अजय भट्ट
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अजय भट्ट
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट - रानीखेत
ऐसा माना जाता है कि राज्य की रानीखेत सीट से जिस पार्टी का उम्मीदवार जीतता है उस पार्टी की सरकार कभी नहीं बनी है। 2002 और 2012 में जीत दर्ज करने वाले अजय भट्ट को इस सीट पर जीतना स्वयं की प्रतिष्ठा के लिए ज्यादा जरूरी है।
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सौरभ बहुगुणा
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सौरभ बहुगुणा
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट- सितारगंज
इस बार विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा के पास पिता की प्रतिष्ठा को बचाना बड़ी चुनौती हैं। सौरभ सितारगंज से बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। सितारगंज से पिछले विधानसभा में विजय बहुगुणा ने चुनाव लड़ रहा था। अब इस सीट पर सौरभ उनकी विरासत संभाल रहे हैं।
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ऋतु खंडूड़ी
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ऋतु खंडूड़ी
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट- यमकेश्वर
पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी अपने राजनीतिक जीवन की बड़ी पारी खेल रहे हैं। खंडूड़ी ने अपनी बेटी ऋतु खंडूड़ी को गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले की यमकेश्वर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा है। खंडूड़ी अपनी राजनीतिक विरासत अपनी संतान को सौंपना चाहते हैं।
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सतपाल महाराज
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सतपाल महाराज
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट- चौबट्टाखाल
केंद्र की राजनीति छोड़ प्रदेश की सियासत में कूदे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सतपाल महाराज की भूमिका इस चुनाव से तय होगी। सीएम की रेस में माने जा रहे महाराज पर चौबट्टाखाल से जीतने का दबाव है। वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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यशपाल आर्य
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यशपाल आर्य
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट- बाजपुर
कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कैबिनेट मंत्री यशपाल के परिवार की साख इस चुनाव से जुड़ी है। उनके बेटे संजीव आर्य भी रानीखेत से प्रत्याशी हैं, अपने साथ बेटे को जिता कर आर्य अपना कद बढ़ा कर पाते हैं या नहीं, यह 11 मार्च को तय होगा।
हरक सिंह रावत
पार्टी- भारतीय जनता पार्टी
विधानसभा सीट- कोटद्वार
कोटद्वार सीट पर गढ़वाल के शेर कहे जाने वाले भाजपा नेता हरक सिंह को अपनी साख बचाने की चुनौती है। हरक सिंह रावत दावा करते हैं कि वे जहां भी जाएंगे जीतकर आएंगे, लेकिन इस बार कोटद्वार में हरक सिंह के लिए अग्निपरीक्षा है। आज तक हरक सिंह रावत ने पहाड़ की विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार वो मैदानी सीट पर मुकाबले के लिए उतरे हैं।