शहाबुद्दीन ने कोर्ट लगाकर सुना दिया फैसला
इस बात की जानकारी मिलते ही तत्कालीन सांसद शहाबुद्दीन मौके पर पहुंचे और वहीं कोर्ट लगाकर फैसला सुना दिया कि दोनों भाईयों (गिरीश और सतीश) को एसिड स्नान कराओ। शहाबुद्दीन का फरमान सुनते ही दोनों पर तेजाब डाल दिया गया और राजीव को बंधक बना पिता चंदा बाबू से फिरौती मांगने लगे।
डीआईजी के हस्तक्षेप के बाद थाने में दर्ज हुआ मामला
तीसरे दिन राजीव किसी तरह बदमाशों के चंगुल से भाग गया और घर पहुंचकर पिता चंदा बाबू को शहाबुद्दीन की पूरी कारस्तानी बताई। चंदा बाबू को धमकी दी गई कि अगर उन्होंने पुलिस को इस कांड की जानकारी दी तो अच्छा नहीं होगा। लेकिन चंदा बाबू बिना किसी खौफ के थाने पहुंच गए और शहाबुद्दीन के खिलाफ शिकायत की। लेकिन उस क्षेत्र में शहाबुद्दीन का इतना खौफ था कि थानेदार के भी हाथ कांपने लगे। उसने चंदा बाबू को समझाया कि इस उम्र में शहाबुद्दीन से पंगा मत लो। लेकिन चंदा बाबू नहीं माने, वे एसपी के पास गए। एसपी नहीं नहीं मिले तो डीआईजी के पास गए। तब जाकर शहाबुद्दीन के खिलाफ केस दर्ज हुआ।
16 साल बाद मिला इंसाफ
70 की उम्र में चंदा बाबू गवाह बने। कोर्ट में गवाही से तीन दिन पहले चश्मदीद राजीव को गोलियों से भून दिया गया। दिसंबर 2020 को केस लड़ते-लड़ते चंदा बाबू का निधन हो गया, पर शहाबुद्दीन को सजा दिलवा गए।