अलगाववादी नेता मसर्रत आलम रिहा होते ही फिर गिरफ्तार हुए हैं। कठुआ जेल से शाम सात बजे के लगभग मसर्रत आलम को रिहा कर दिया गया लेकिन जेल के मुख्यद्वार के पास ही पुलिस का एक अन्य वाहन मसर्रत आलत सहित रिहा किए गए अन्य तीन लोगों को लेने का इंतजार कर रहा था। जेल से बाहर निकलते ही पुलिस ने उन्हें वाहन में डाल लिया। जिसके बाद सभी को जम्मू के मीरां साहिब स्थित जेआईसी लेने के लिए वाहन रवाना हो गया।
उस पर सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी कराने का आरोप है, जिनमें कई सुरक्षाकर्मियों की मौत भी हुईं। मसर्रत पर संवेदनशील इलाकों में भड़काऊ भाषण के भी आरोप है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को मसर्रत आलम को कठुआ जेल से रिहा किया गया है।
मसर्रत को 2015 में काफी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया गया था। गिलानी के करीबी माने जाने वाले मसर्रत आलम पर दस लाख रुपये का ईनाम भी रखा गया था। मसर्रत 2015 से पब्लिक सेफ्टी एक्ट यानी पीएसए के तहत जेल में बंद था।
मसर्रत आलम की रिहाई के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा है कि पिछले चार साल से कश्मीर में शांति की एक बड़ी वजह यही थी कि मसरत आलम जेल में था। सीएम रहते मसर्रत को जेल में डालने वाले उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर इस फैसले पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा- आलम 2010 के विरोध प्रदर्शन का मास्टरमाइंड था। ये कोई संयोग नहीं है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शन खत्म हो गए। 2010 की गर्मियों में जो कुछ हुआ, वैसा दोबारा नहीं हुआ। अफजल गुरु की फांसी के बाद भी नहीं हुआ, क्योंकि आलम नहीं था तो अब या तो मुफ्ती सईद से एक नए सौदे के तहत आलम बाहर आया है, या फिर वो घाटी में फिर उत्पात मचाने वाला है। वक्त ही बताएगा।
Separatist leader Masarat Alam Bhat released from Kathua jail after J&K High court order. pic.twitter.com/b1RdqCCnlo
— ANI (@ANI_news) December 29, 2016