आरएसएस के सदस्य शाखा में अभ्यास के दौरान
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने जेएनयू में लगे राष्ट्रविरोधी नारों की निंदा की और कहा कि इन्हें राजनीति का अड्डा नहीं बनने देंगे। आरएसएस ने उम्मीद जाहिर की कि केन्द्र व राज्य सरकारें विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में इस तरह की विध्वंसकारी गतिविधियों पर ध्यान देंगे। ऐसे तत्वों को कुछ राजनीतिक दलों का समर्थन मिलना भी बहुत चिंताजनक है। साथ ही, आरएसएस ने मालदा हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए राजनीतिक दलों से कहा कि वे तुष्टीकरण की राजनीति छोड़ कर इन घटनाओं को गम्भीरता से ले।
राजस्थान के नागौर जिले में शुक्रवार से शुरू हुई आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह सुरेश जोशी की ओर से रखी गई वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंतत्रता के नाम पर किसी को भी देश को तोडऩे वाली बातें कहने और संसद पर हमले के दोषियों को शहीद का दर्जा देने की इजाजत कैसे दी जा सकती है? रिपोर्ट में कहा गया कि कई विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में विध्वंसकारी ताकतें लम्बे समय से जमीं हुई हैं। इन ताकतों का संविधान, न्यायपालिका और देश की व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है। रिपोर्ट में उम्मीद जाहिर की गई है कि केन्द्र व राज्य सरकारें ऐसे राष्ट्रविरोधी और असामजिक तत्वों के साथ सख्ती से पेश आएंगी।
इससे पूर्व सरसंघचालक मोहन भागवत ने प्रतिनिधि सभा की औपचारिक शुरुआत की। संघ की इस बैठक में समाजिक समरसता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मीडिया से बातचीत में सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने सभा में आरक्षण और राम मंदिर निर्माण के मुद्दों पर चर्चा के बारे में कहा कि आरक्षण रहेगा। यह संविधान सम्मत है और देश ने इसे स्वीकार किया है। हालांकि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के मामले पर पूछे गए सवाल को टाल दिया।
अमित शाह और भागवत की लम्बी बैठक
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी तीन दिन के लिए यहां आए हुए हैं। भागवत व शाह के बीच शुक्रवार को लम्बी बैठक चली। माना जा रहा है कि दोनों ने पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के बारे में चर्चा की।
वर्षभर में बढ़ीं साढे पांच हजार से ज्यादा शाखाएं
कृष्ण गोपाल ने मीडिया को बताया कि जहां 2012 से 2015 के बीच 10413 शाखाएं बढ़ी थीं, वहीं पिछले एक वर्ष में 5524 शाखाएं बढ़ी हैं और इस समय देशभर में कुल 56859 शाखाएं संचालित हैं।
बदल सकता है गणवेष
संघ की इस बैठक में करीब 90 वर्ष बाद गणवेष का बदलना तय माना जा रहा है। खाकी नेकर की जगह संघ अब फुलपैंट अपना सकता है और यह ग्रे कलर की हो सकती है। कृष्ण गोपाल ने कहा कि गणवेष का विषय विचाराधीन है और जो भी निर्णय किया जाएगा वह मौजूदा समय की आवश्यकताओं के अनुरूप होगा।