केंद्रीय बिजली मंत्रालय की ओर से जारी राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2020 में राजस्थान को कर्नाटक के बाद दूसरा स्थान मिला है। एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि राजस्थान को 61 अंक मिले हैं जो साल 2019 में मिले 18.5 अंकों के मुकाबले कहीं अधिक है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (विद्युत) सुबोध अग्रवाल ने एक बयान में कहा कि साल 2019 की रैंकिंग में किसी भी राज्य को सबसे अग्रिम श्रेणी में स्थान नहीं मिला था। हालांकिस इस साल राजस्थान से सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए इस श्रेणी में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
अग्रवाल ने कहा कि यह प्रदेश की बड़ी छलांग है। यह राज्य सरकार के केंद्रित दृष्टिकोण व नीतिगत पहलों के चलते संभव हुआ है। 2019 की सौर ऊर्जा नीति और पवन व हाइब्रिड ऊर्जा नीति, यहां के अक्षय ऊर्जा संसाधनों का दोहन करने के लिए मुख्य रूप से उभरे हैं।
राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक में राज्यों का चार श्रेणियों में आंकलन किया जाता है। इसके तहत पहली श्रेणी एस्पिरेंट (30 से कम अंक), दूसरी श्रेणी कंटेंडर (30 से 50 अंक), तीसरी श्रेणी अचीवर्स (50 से 60 अंक) और चौथी श्रेणी फ्रंटनर्स (60 से अधिक अंक) तय की गई है।
2020 के सूचकांक में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन का आकलन किया गया है। सूचकांक में अधिकतम अंक 100 होते हैं और 68 संकेतकों के आधार पर अंक दिए जाते हैं। इस साल राजस्थान ने इस सूचकांक में सबसे अधिक बेहतरी का प्रदर्शन किया।