भारत के इतिहास में मेवाड़ की एक अलग पहचान है। महाराणा प्रताप के इतिहास को लेकर कांग्रेस-भाजपा के बीच सियासी जंग चलती रहती है। इस बार भी राजस्थान चुनाव में मेवाड़-बागड़ में 35 सीटों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच दिलचस्प संघर्ष चल रहा है। भाजपा पिछली बार से सीटें बढ़ाने के लिए मोदी से लेकर जेपी नड्डा तक की रैलियां करा रही है, वहीं कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक को चुनाव प्रचार के लिए बुला रही है। इस बार उदयपुर सीट से कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने राजपरिवार से विश्वराज सिंह को नाथद्वारा सीट से उतारकर चुनाव को मेवाड़ की अस्मिता से जोड़ दिया है।
रोचक यह है कि इस चुनाव में मेवाड़ के दो सीपी जोशी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी की प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मेवाड़-बागड़ में भाजपा के वर्चस्व को कायम रखने की चुनौती है, जबकि मेवाड़ राजपरिवार के सामने चुनावी टक्कर ले रहे स्पीकर सीपी जोशी को अपनी साख बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 3 दिसंबर को पता चलेगा कि किस जोशी की प्रतिष्ठा बची या धूमिल हुई। खास यह है कि साढ़े चार दशक में पहली बार भाजपा गुलाब चंद कटारिया के बिना यह चुनाव लड़ रही है। कुछ समय पहले ही उन्हें केंद्र सरकार ने असम का राज्यपाल बनाया है, जबकि उम्र के कारण कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरजा व्यास चुनाव नहीं लड़ रही है। इस क्षेत्र में भाजपा ने उदयपुर के कन्हैया लाल हत्याकांड और भीलवाड़ा में बच्ची से दुष्कर्म कर भट्टी में जला देने के मामले को भी मुद्दा बनाया हुआ है।
मेवाड़ की दो सीटें सबसे अधिक चर्चा में
राजसमंद जिले की नाथद्वारा सीट पर विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी का मुकाबला मेवाड़ राजपरिवार के भाजपा प्रत्याशी विश्वराज सिंह से है। 2008 के विधानसभा चुनाव में सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हारने के कारण वह मुख्यमंत्री बनने से रह गए थे। चित्तौड़गढ़ से भाजपा के बागी उम्मीद चंद्रभान सिंह आक्या निर्दलीय के तौर पर मैदान में हैं। वे लगातार दो बार से भाजपा विधायक रहे। यहां से भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी मैदान में हैं। राजवी भैरो सिंह शेखावत के दामाद है। कांग्रेस ने सुरेंद्र जाड़ावत को टिकट दिया है। इसलिए मुकाबला त्रिकोणीय है।
मेवाड़- बागड़ का राजनीतिक समीकरण
उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा जिले तो मेवाड़ में आते हैं, जबकि डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ तीन जिले बांगड़ में आते हैं। इस क्षेत्र में विधानसभा की 35 सीटें आती हैं, जिसमें 16 एसटी और एक सीट एससी के लिए आरक्षित है। इसमें भाजपा के पास 19, कांग्रेस के पास 12, बीटीपी के पास दो और दो सीटें निर्दलीयों के पास हैं।
एसटी सीटों पर कांग्रेस-भाजपा की नजर
मेवाड़ बागड़ की 16 एससी सीटों पर कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस हर हाल में अपनी सीटों की संख्या में इजाफा करने के लिए जोर लगा रही है, जबकि जनजाति समाज को साधने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। पिछले एक साल से पीएम मोदी का राज्य की जनजाति सीटों पर फोकस है। मोदी के कार्यक्रम भी हो चुके हैं। बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में भी मानगढ़ धाम को शामिल किया है।
क्षेत्र में इतनी सीटें
- चित्तौड़गढ़ 05
- राजसमंद 04
- उदयपुर 08
- भीलवाड़ा 07
- डूंगरपुर 04
- बांसवाड़ा 05
- प्रतापगढ़ 02