कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही के ‘मैकू’, ‘भीखू’, ‘हरिया’, ‘गोबर’ सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले से खुश हैं। चाय की दुकान पर बैठे अखबार पढ़ रहे लोग नोटबंदी की ही चर्चा में मशगूल हैं। गांव के पूर्व प्रधान संतोष पटेल कहते हैं कि मुंशी जी अपनी कहानियों और उपन्यासों में अमीरी-गरीबी की खाई को पाटने का जो संदेश देते थे, वह अब पीएम के फैसले से साकार होता दिख रहा है।
संतोष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि गरीब अभी भी सेठ साहूकारों के चक्कर में गरीब हो रहा है। नोटबंदी के फैसले से देश की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी। नोटबंदी के बीच गांव में नंदलाल गुप्ता और बिरजू पटेल के घर बेटी की शादी हुई। इस दौरान न केवल रिश्तेदारों बल्कि गांव वालों ने हर संभव मदद की।
शादी से पहले कार्यक्रम के दौरान ढोल नगाड़े के साथ कुआं के पास पूजा अर्चना कर रही महिलाएं ममता मिश्रा, माया, कृष्णा पांडेय, खुशबू जायसवाल कहती हैं कि नोटबंदी के फैसले से पिछड़े गांवों का विकास होगा। गांव के किसानों को खाद बीज पुराने 500 के नोट से मिलने लगे हैं।
गांव के पास बैंक ऑफ बड़ौदा का एटीएम बंद पड़ा था। बगल में केनरा बैंक की एक शाखा जल्द खुलने का बोर्ड लगा था। पास ही में सिंडिकेट बैंक, काशी ग्रामीण गोमती संयुत बैंक में अन्य दिनों की अपेक्षा भीड़ कम रही। गांव वालों के नोट बदलने और कैश निकाले जा रहे थे।
डाकघर में गांव की अस्सी प्रतिशत महिलाओं का खाता
गांव की अस्सी प्रतिशत महिलाओं का खाता डाकघर में हैं, तो पुरुषों का खाता आसपास के कई बैंकों में है। डाकघर के कर्मचारी पंकज कुमार ने बताया कि 250 खाते हैं। इनमें से 200 खाते गांव की महिलाओं के हैं। यह छोटी शाखा है। इसमें 5 हजार रुपये निकासी और 25 हजार रुपये जमा करने की सुविधा दी गई है। अधिकतर महिलाएं 10 हजार रुपये जमा कर रही हैं और दो हजार रुपये निकाल रही हैं।