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मध्यप्रदेश: युवा ब्रिगेड से किसी ने भी सिंधिया को नहीं रोका, फिर सामने आया पीढ़ी का टकराव

Wed, 11 Mar 2020 02:51 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। गुना के पूर्व सांसद ने होली के दिन दोपहर 12.10 बजे अपने इस्तीफे की चिट्ठी ट्वीट करके सभी को चौंका दिया। उन्हें कांग्रेस का युवा चेहरा और राहुल गांधी का करीबी माना जाता था।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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खास बात यह है कि सिंधिया ने अपना इस्तीफा नौ मार्च को लिख दिया था। कांग्रेस ने भी देर न करते हुए 20 मिनट में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। इसके बाद मध्यप्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने अपने इस्तीफे के साथ ग्रुप फोटो भेज दिया। जिसने कमलनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया।

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इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कांग्रेस के अंदर जारी गुटबाजी और शीर्ष नेतृत्व की उदासीनता को दिखाने का काम किया। पिछले कई सालों से पार्टी के अंदर पीढ़ीगत टकराव चल रहा है। जिसकी गाहे-बगाहे झलक दिखती रहती है। वहीं जिस समय देश में सीएए-एनआरसी को लेकर बहस जारी है, उस समय एक अहम नेता के इस्तीफे से विपक्षी पार्टी को जोर का झटका लगना स्वाभाविक है। 

सिंधिया बेशक धीरे-धीरे कांग्रेस से दूरी बना रहे थे लेकिन उन्हें पार्टी में राहुल गांधी का करीबी माना जाता था। वह 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल के बगल में बैठे हुए नजर आए थे। उनकी इच्छाओं के साथ सामंजस्य बैठाने और उन्हें मध्यप्रदेश की राजनीति से अलग करने का खामियाजा कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ेगा।

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कांग्रेस में इस तरह की सुगबुगाहट है कि कई युवा नेताओं की आंकाक्षाओं को दरकिनार करते हुए उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सहयोगी के तौर पर काम करने के लिए कहा जाता है। सिंधिया ने सोनिया गांधी को लिखे त्यागपत्र में लिखा है कि उनके लिए मध्यप्रदेश और देश की जनता की सेवा करना मुश्किल हो गया है और पिछले कुछ सालों में यह रास्ता अपने आप बना है।

सिंधिया के इस्तीफे पर मौन है युवा ब्रिगेड
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की युवा ब्रिगेड के महत्वपूर्ण नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे पर पार्टी के युवा नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस की युवा ब्रिगेड में सिंधिया के अलावा सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, कुलदीप विश्नोई, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, गौरव गोगोई, सुष्मिता देव, ज्योति मिर्धा और अदिति सिंह का नाम प्रमुख है। ये सभी ऐसे नेता हैं जिन्हें 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अपने-अपने राज्य की राजनीति में किनारे कर दिया गया है।

पायलट को बनाया को-पायलट
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रबल दावेदार रहे सचिन पायलट को भी राज्य की सत्ता की प्रमुख सीट नहीं मिल सकी। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद पर संतोष करना पड़ा है। लेकिन कांग्रेस पार्टी और राहुल-प्रियंका को यह चिंता जरूर सता रही होगाी कि आखिर पार्टी के युवा सितारे सिंधिया के इस्तीफे पर आखिर मौन क्यों हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुप्पी को असंतोष भी माना जा सकता है।

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