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बदल रहा है 2019 का सियासी मौसम...पासवान ने दिए संकेत 

Wed, 19 Dec 2018 06:50 PM IST
अमित मंडल अमित मंडल, अमर उजाला

सार

  • अतीत में रामविलास पासवान कई बार अपना पाला बदल चुके हैं
  • पासवान का सियासी मिजाज बताता है हवा किस ओर बह रही है
  • चिराग पासवान ने ट्वीट कर सियासी हलचल को बढ़ा दिया 
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2019 चुनाव की जंग और पासवान के रंग - फोटो : अमर उजाला (ग्राफिक्स - रोहित झा)
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विस्तार
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सियासी गलियारों में यह बात आम है कि लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान चुनाव के वक्त जिस तरफ झुकते हैं, उधर की सियासी फिजा बदल रही होती है। अतीत में पासवान कई बार इस तरह के संकेत देकर अपना पाला बदल चुके हैं। कभी एनडीए तो कभी यूपीए और फिर एनडीए, उनका ठिकाना बदलता रहता है। पासवान का सियासी मिजाज अक्सर तय कर देता है कि हवा किस ओर बह रही है। सियासी गलियारों में उन्हें राजनीति का मौसम विज्ञानी भी कहा जाता है। लेकिन इस बार रामविलास पासवान ने नहीं, उनके बेटे चिराग पासवान ने संकेत दिया है। ये वही चिराग पासवान हैं जिन्होंने 2014 में अपने पिता को यूपीए छोड़कर एनडीए के साथ जाने की सलाह दी थी। आज पासवान केंद्र में मंत्री हैं और कांग्रेस सत्ता से बाहर। 

चाचा-भतीजे ने दिया संकेत

राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता इसे पासवान ने हर बार साबित किया है। तो क्या इस बार भी वह साथी बदलने जा रहे हैं? रामविलास पासवान के बेटे और लोजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड अध्यक्ष चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस ने सियासी गर्मी बढ़ा दी। मौका देख लोजपा ने सीट बंटवारे पर मोलभाव शुरू कर दिया है। चिराग पासवान ने आज दो ट्वीट कर सियासी हलचल पैदा कर दी। पहले ट्वीट में उन्होंने सहयोगी दलों के प्रति भाजपा के रूख पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपने सहयोगियों को एकजुट रखने के प्रयास करने होंगे। क्योंकि हाल ही में रालोसपा और टीडीपी जैसे दल एनडीए से अलग हो गए हैं। 
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उनका दूसरा ट्वीट आगामी चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर था। इस ट्वीट में चिराग ने लिखा-

गठबंधन की सीटों को लेकर कई बार भारतीय जनता पार्टी के नेताओ से मुलाकात हुई परंतु अभी तक कुछ ठोस बात आगे नहीं बढ़ पाई है। इस विषय पर समय रहते बात नहीं बनी तो इससे नुक़सान भी हो सकता है।


वहीं, रामविलास पासवान के भाई और लोजपा के कोटे से बिहार सरकार में पशु और मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति पारस ने भाजपा को 31 दिसंबर तक सीटों पर फैसला करने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एनडीए के सभी नेताओं के साथ बैठक करनी चाहिए। उन्होंंने झारखंड और उत्तरप्रदेश में भी सीटों की मांग कर डाली। 
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चिराग के ट्वीट तीन राज्यों में भाजपा को लगे झटके के बाद आने वाली दिक्कतों की शुरुआत कही जा सकती है। नतीजों के बाद भाजपा बैकफुट पर है। ऐसे में अब सहयोगी दल उसपर दबाव बढ़ा सकते हैं। चिराग ने मोर्चा खोलने की शुरुआत कर दी है। 


 

 

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कई दल हुए एनडीए से अलग 

2019 चुनाव की जंग और पासवान के रंग

 

एनडीए से अलग हो चुके उपेंद्र कुशवाहा पहले ही मोर्चा खोले बैठे हैं। कभी हर मुद्दे पर भाजपा के साथ खड़े नजर आने वाले चंद्रबाबू नायडू अब कांग्रेस के नजदीक आ चुके हैं। पुराना साथी शिवसेना इस कदर रुठी है कि आए दिन सामना के जरिए सीधे पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोल देती है। तल्खी ऐसी कि अब उद्धव ठाकरे और पीएम मोदी एक मंच पर नजर ही नहीं आते। 

2019 का रण नजदीक है। भाजपा के सामने इस बार जबरदस्त चुनौती है। कांग्रेस ने जिस अंदाज में तीन राज्यों में वापसी की है उसने भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। भाजपा से मुकाबले के लिए महागठबंधन भी ताल ठोकने को तैयार है। कई मंचों पर गैर भाजपा दल अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कर चुके हैं। तकरीबन सभी विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ लामबंद हैं और किसी भी कीमत पर भाजपा को दोबारा सत्तासीन होने से रोकना चाहते हैं।   

तीन राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद भाजपा के सामने 2019 का रण मुश्किल हो गया है। अपनी टीम को एकजुट रखकर ही वह सत्ता वापसी का सपना पूरा कर सकेगी। लेकिन हालिया समय में उसने कई अहम साथी खो दिए हैं। उसपर से उत्तर प्रदेश के हालात भी दिक्कत पैदा कर रहे हैं। दिल्ली की सत्ता का दरवाजा उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, लेकिन यहां सपा-बसपा का गठजोड़ बनता दिख रहा है। ऐसा हुआ तो 30 सीटें आना भी मुश्किल हो जाएगा। दिल्ली में दोबारा कैसे कमल खिल पाएगा, ये भाजपा के लिए सबसे बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। 
 
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