झारखंड की राजधानी रांची में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर आंदोलनरत छात्रों और राज्य सरकार के प्रतिनिधि के बीच बातचीत में कोई सहमति नहीं बनी। स्टेट गेस्ट हाउस में शुक्रवार शाम करीब डेढ़ घंटे तक चली वार्ता के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार के साथ सहमति नहीं बन सकी है। इसलिए आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। वहीं, सोरेन सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने वार्ता को सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जल्द ही मामला सुलझा लिया जाएगा।
10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम
बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्रों ने कहा कि सरकार ने उनका मांग पत्र स्वीकार कर लिया, लेकिन समाधान के लिए ठोस आश्वासन नहीं मिला। छात्रों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पहले की तरह किया कि आंदोलन अभी जारी रहेगा और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम हर हाल में होगा। छात्र नेताओं ने झारखंड के युवाओं और अभ्यर्थियों से अधिक से अधिक संख्या में रांची पहुंचकर विधानसभा घेराव को सफल बनाने की अपील की।
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा पर फेंकी स्याही
विधानसभा मार्च के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को एक छात्र गुट ने मंच से उतार दिया था। छात्रों का कहना था कि आंदोलन सिर्फ अभ्यर्थियों का है और किसी भी राजनीतिक दल का एजेंडा यहां स्वीकार नहीं होगा। बाद में विधानसभा मार्च के दौरान नेहा बोरा पर स्याही भी फेंकी गई, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी। नेहा बोरा पर हुए स्याही हमले पर एबीवीपी जेएनयू गर्ल्स वर्क संयोजक मनीषा ने कहा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कभी भी ऐसी घटनाओं या गतिविधियों का समर्थन नहीं करती; यह एबीवीपी का कार्य करने का तरीका कभी नहीं रहा है। झारखंड को लेकर छात्र विरोध प्रदर्शन काफी समय से चल रहा है; यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा है, और ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। फिर भी, जैसे ही नेहा बोरा वहां पहुंचीं, अचानक ऐसी घटना सामने आ गई। इससे स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि यह घटना पूर्व नियोजित थी।
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उन्होंने कहा, इस घटना के माध्यम से, एआईएसए ने झारखंड के छात्र विरोध प्रदर्शन का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया है। बकौल मनीषा, 'मैं ऐसा इसलिए कह रही हूं क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब एआईएसए ने ऐसा कुछ किया है; यह ठीक उनके काम करने का तरीका है। एआईएसए को छात्रों, उनकी वास्तविक समस्याओं या शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य झूठी बातें फैलाना, राष्ट्र-विरोधी नारे लगाना, राष्ट्र-विरोधी ताकतों का समर्थन करना और 'शहरी नक्सलवाद' को बढ़ावा देना है।” अब जब उन्हें यह एहसास हो गया है कि जेएनयू में उनकी प्रासंगिकता कम हो रही है, या वास्तव में पहले ही समाप्त हो चुकी है, तो वे अन्य मंचों की तलाश कर रहे हैं।'
वार्ता के बाद सरकार का रूख क्या?
रांची में जेपीएससी-जेएसएससी उम्मीदवारों के विरोध प्रदर्शन पर झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, छात्रों ने अपनी मांग सार्वजनिक कर दी है। उन्होंने विस्तार से हमें अपनी मांग समझाई है। हमने उनसे कुछ मुद्दों पर लिखित ब्योरा मांगा है। आंदोनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, हमने उनके मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे हैं। जल्द ही इसका समाधान निकल जाएगा।
भाजपा सांसदों ने कांग्रेस-विपक्ष को घेरा, मांग क्या?
जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार का विरोध करने और झारखंड के छात्रों की कथित अनदेखी पर गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, 'रांची में जेपीएससी-जेएसएससी उम्मीदवार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम इस मुद्दे को संसद में उठा रहे हैं। यह मामला झारखंड के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। हम सीबीआई जांच कराने की कोशिश करेंगे... झारखंड कांग्रेस के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है।' एक अन्य भाजपा सांसद धर्मशिला गुप्ता ने कहा, विपक्षी नेता छात्रों को जंतर-मंतर पर अपना आंदोलन तेज करने के लिए उकसाते थे। अब वे कांग्रेस, सपा और बसपा के नेता कहां हैं? झारखंड के युवा उन लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे जिन्होंने उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।'
सरकार के साथ वार्ता: आंदोलनकारी छात्रों ने क्या कहा?
राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद, विरोध प्रदर्शन में शामिल राजेश प्रसाद ने कहा, इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, पहली बार छात्रों ने मंत्रियों से बातचीत की। वार्ता बहुत सकारात्मक रही। छात्रों की सभी मांगों को मंत्रियों ने विस्तार से सुना। मंत्रियों ने हमारी बात सुनी और कहा कि हमारी मांगें वास्तविक हैं। उन्होंने कहा कि इन मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और इन मांगों को पूरा करने के लिए जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
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- सरकार से बातचीत करने वाले प्रतिनिधिमंडल में उक्त छात्र नेताों के अलावा अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी समेत अन्य भी शामिल।
- 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग।
- सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के एक पैनल से स्वतंत्र जांच की मांग।
- राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है। परिणाम जल्द ही सामने आएगा।
- छह दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो बोले- सरकार से बातचीत के लिए निमंत्रण मिला है। इस समूह ने चर्चा के लिए सरकार को आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के नाम सौंपे।
सरकार चिकित्सकों की टीम भेजेगी
एक अन्य आंदोलनकारी ने कहा, वार्ता के दौरान सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार हमारी सभी मांगों के प्रति संवेदनशील है और हमारी मांगों को जल्द ही मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। सरकार ने आंदोलन के दौरान राष्ट्रविरोधी तत्वों से सतर्क रहने को भी कहा है। हमने उन्हें बताया कि हमारे मंच पर कोई राष्ट्रविरोधी या उपद्रवी नहीं है। इस पर उन्होंने हमारे अनुशासन की सराहना की। बैठक का दूसरा दौर भी होगा और हमें मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बारे में बताया जाएगा। सरकार ने दस्तावेजी सबूत मांगे हैं। आंदोनकारियों का निर्धारित विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। सरकार की तरफ से सकारात्मक जवाब मिलने और मांगें मान लेने पर विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया जाएगा। सरकार एक विशेष चिकित्सा दल भी भेजेगी।
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सरकार का रूख सकारात्मक
जेपीएससी-जेएसएससी उम्मीदवारों के विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रा नीतू कुजूर ने कहा, सरकार छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के समन्वय और हमारे बात करने के तरीके से प्रभावित हुई। ऐसा लगा जैसे हमने वाकई में समस्या का समाधान ढूंढ लिया है। सुधार जरूर होने चाहिए, सरकार इसके लिए तैयार है... हमें लगता है कि सरकार वाकई में हमारा समर्थन करने को तैयार है।
क्या 10 अगस्त को विधानसभा घेराव?
वार्ता के बाद एक अन्य छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा, 10 अगस्त को 'विधानसभा घेराव' का हमारा प्रस्ताव कायम है। हम 10 अगस्त को योजना के मुताबिक आगे बढ़ेंगे। जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। 'विधानसभा घेराव' किया जाएगा। सरकार के साथ चर्चा चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी।
क्या समाधान के लिए मंत्रियों की तरफ से समय-सीमा नहीं दी गई?
एक अन्य छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा, आंदोलनकारियों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के शिष्टमंडल से मुलाकात की। हमने सरकार को मुख्य मांगों को विस्तार से समझाया। मंत्रियों ने हमें ध्यान से सुना और आश्वासन दिया कि वे हमारी मुख्य मांगों पर विचार करेंगे। हमें कोई समय सीमा नहीं दी गई है। मांगें पूरी होने तक हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।