जामा मस्जिद इलाके का एक पोलिंग बूथ (फाइल फोटो)
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देश में अभी चुनावी माहौल है। लोग अपने शहर-अपने जिले के प्रतिनिधियों का आकलन कर रहे हैं। नवंबर और दिसंबर में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और आगामी वर्ष में लोग 17वीं लोकसभा के लिए चुनाव में हिस्सा लेंगे। लेकिन क्या आपको पता है कि पहली लोकसभा के लिए जब चुनाव हुए थे तो हालात क्या थे?
जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो देश के हालात ठीक नहीं थे। पहले प्रधानमंत्री के रूप में जवाहर लाल नेहरू के सामने कई समस्याएं थीं। देश में भुखमरी थी, लोग निरक्षर थे, फूट डालो शासन करो की नीति ने भी काफी कमाल दिखा दिया था। ऐसे में देश में पहले लोकसभा चुनाव के बारे में सोचना एक नामुमकिन सपने की तरह था।
आजादी के चार साल बाद यानि 25 अक्तूबर 1951 को पहला लोकसभा चुनाव होना था। लोकसभा की 497 और राज्य विधानसभाओं की 3283 सीटों के लिए भारत के 17 करोड़ 32 लाख 12 हजार 343 मतदाताओं को वोट देना था। जनता इस चुनाव की एहमियत समझ पाएगी इस पर तत्कालीन राजनेताओं को शक था। लेकिन नवस्वतंत्र देश का लोकतंत्रीकरण के लिए पूरा देश एकत्रित हुआ और भारत को विश्व के घोषित लोकतांत्रिक देशों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया।
यह पहला लोकसभा चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से लेकर 21 फरवरी 1952 तक यानी करीब चार महीने तक चला। देश के इस रोमांचित चुनाव में 85 फीसदी मतदाता निरक्षर थे। उसके बावजदू उन्होंने अंग्रेजों के इस कथन को झुठला दिया कि यह देश लोकतंत्र को न तो पचा पाएगा और न ही इसे संभाल कर रख पाएगा।