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किसानों ने आंदोलन में 'घुसपैठ' रोकने के लिए बनाई 'सिक्योरिटी रिंग', आधार कार्ड देखकर हो रही है एंट्री

Sat, 30 Jan 2021 07:55 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किसानों को डर है कि गाजीपुर बॉर्डर की तरह किसी भी दिन पुलिस यहां भी कार्रवाई कर सकती है या कोई अनजान आदमी हमारे बीच रहकर कोई भी घटना को अंजाम दे सकता है...
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सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद किसान संगठनों की परेशानी बढ़ने लगी है। किसी भी अप्रिय घटना या पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अब किसान खुद ही अपनी सुरक्षा में जुट गए हैं। सिंघु बॉर्डर पर अनजान व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए एक टीम तैनात की गई है। किसान नेताओं से भरे रहने वाले पंडाल की भी गतिविधियों को देखने के लिए सीसीटीवी कैमरे तक लगा दिए गए हैं। किसान नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और खुफिया एजेंसी के लोग वेश बदलकर यहां जांच पड़ताल कर रहे हैं।

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सिंघु बॉर्डर पर दो माह से ज्यादा समय से किसानों का शांतिपूर्वक प्रदर्शन चल रहा है। लेकिन गणतंत्र दिवस पर हुई घटना के बाद से किसान संगठन डरे हुए नजर आ रहे हैं। किसानों को डर है कि गाजीपुर बॉर्डर की तरह किसी भी दिन पुलिस यहां भी कार्रवाई कर सकती है या कोई अनजान आदमी हमारे बीच रहकर कोई भी घटना को अंजाम दे सकता है। इससे किसानों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बदनामी के डर से किसानों ने बॉर्डर के चारों ओर सुरक्षा मजबूत कर दी है। वहीं हर अजनबी शख्स से पूछताछ की जा रही है।

पहचान पत्र और आधार कार्ड का फोटो ले रहे हैं किसान

हिंसा के अगले दिन से ही बॉर्डर पर हालात बदल गए हैं। अधिकांश किसान जत्थों को छोड़कर घरों को लौट चुके हैं। पंडाल से लेकर लंगर तक सब खाली नजर आ रहे हैं। लोगों की भीड़ छटने के बाद किसान संगठन बॉर्डर की सुरक्षा में जुट गए है। इसके लिए 3 हजार वालंटियर्स की टीम तैयार की गई है।

अमर उजाला से बातचीत में एक वालंटियर ने कहा, सिंघु बॉर्डर में पांच से छह जगह से प्रवेश होता है। जगह-जगह हमने अपने वालंटियर तैनात किए हैं। जो आम लोग हैं उन्हें किसी भी तरह से कोई परेशान नहीं किया जा रहा है। जो लोग रोज यहां रहते हैं उनकी एक सूची पहले ही तैयार की जा चुकी है। इसके अलावा यहां आने वाले अजनबी लोगों का आईकार्ड और आधार कार्ड चेक करने के बाद ही हम इन्हें प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश दे रहे हैं।

चार-चार घंटे की ड्यूटी कर रहे युवा और महिलाएं

किसान नेता अमरीक सिंह ने अमर उजाला को बताया कि पुलिस और खुफिया एजेंसी के लोग बड़ी संख्या में प्रदर्शन स्थल पर घूम रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे अनजान लोग भी आ रहे हैं, जो यहां किसानों को बदनाम करने के लिए कोई भी घटना को अंजाम दे सकते हैं। 26 जनवरी की घटना के बाद हमने सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद कर दी है। जो भी संदिग्ध मिलता है, पहले हम उसकी फोटो लेते हैं और अपने स्तर पर जांच पड़ताल करते हैं। इसके बाद पुलिस को सौंप देते हैं। बॉर्डर पर करीब 400 से ज्यादा जत्थेबंदियां हैं। इनकी सुरक्षा के लिए ही हमने यह कदम उठाया है।

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वालंटियर में युवा, बुजुर्ग और महिलाओं की भी ड्यूटी लगाई गई है। सबके ड्यूटी के लिए चार से पांच घंटे तय किए गए हैं। लंगर, पंडाल और रात्रि विश्राम की जगह सबसे ज्यादा चेकिंग होती है। क्योंकि यहां ज्यादा भीड़ होती है। रात्रि विश्राम वाली जगह में लोगों के आधार कार्ड देखकर ही एंट्री होती है। सुबह होते ही उन्हें जाने के लिए कह दिया जाता है। इसके अलावा मंच के आसपास कई तरह के लोग घूमते रहते हैं, उन पर नजर रखने के लिए हमने सीसीटीवी कैमरे तक लगा दिए हैं। यहां कई बड़े नेता आते हैं वहीं किसान मंच पर ही चंदा एकत्र करते हैं। सुरक्षा के चलते प्रदर्शन स्थल पर सामान बेचने वालों को भी हमने बाहर कर दिया है।

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