हमारे देश में कुपोषण और मोटापा सबसे ज्यादा है। आमतौर पर शिशुओं में दोनों ही
बीमारियां पाई जा रही है। लाखों बच्चे इनसे ग्रस्त हैं। एक बीमारी कभी अमीरी गरीबी में अंतर नहीं करती है। दुर्भाग्य यह है कि इसका असर निर्धन पर ही पड़ता है। स्वास्थ्य क्षेत्र की कमजोरियों को गिनाती यह बात मंगलवार को
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में कहीं। संस्थान के 45वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने 572 भावी डॉक्टरों को मेडल दिया।
इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि पढ़ाई के बाद दुनिया भर में आप मरीजों की सेवा करेंगे, लेकिन पहले यह जानना जरूरी है कि समाज को आपकी जरूरत है। मरीज के साथ रिश्ता डॉक्टर की बड़ी पहचान होती है। चिकित्सा से समाज को फायदा मिलता है, न कि समाज से चिकित्सा को। इसका विशेष ध्यान हर डॉक्टर को रखना चाहिए।
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार की उपलब्धियां गिनवाई। 2014 में मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत के बाद से लगातार शिशु मृत्युदर में कमी देखने को मिली है। सरकार गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसके अलावा डॉक्टरों की कमी दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने के लिए देश के कई राज्यों में एम्स खोले जाने पर भी काम हो रहा है।
इन डॉक्टरों को किया सम्मानित
दीक्षांत समारोह में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से डॉ. पुरुषोत्तम उपाध्याय, प्रो. ललित मोहन नाथ, प्रो. ऊषा नायर, प्रो. इंदिरा नाथ, प्रो. एमसी माहेश्वरी और डॉ. मेहरबान सिंह को सम्मानित भी किया गया।