धनबाद में जज की हत्या के केस में झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ इतना चाहते हैं कि मुख्य साजिशकर्ता को सामने लाकर सजा दी जाए। झारखंड आतंकवाद प्रभावित रहा है, लेकिन जज पर हमला पहले कभी नहीं हुआ। पूरे देश की नजरें इस मामले पर है।
सीबीआई की ओर से पेश हुए एडिशनल सोलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सीबीआई के अलावा एनआईए एक योग्य जांच एजेंसी है, उसे यह केस सौंपा जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने प्रतिप्रश्न किया, 'क्या खुद सीबीआई यह केस छोड़ना चाहती है?'
खुद हाईकोर्ट जांच में यह 5 खामियां सामने रखीं
- नार्को रिपोर्ट में आरोपी मान रहे हैं कि वे जज को टक्कर मारने से पहले जानते थे , तो सीबीआई क्यों इस बात पर अड़ी हुई है कि उन्हें जज की पहचान पहले से पता नहीं थी?
- सीबीआई कहती है कि जज आनंद की हत्या उनके मोबाइल फोन के लिए हुई, ऐसा है तो उनका फोन कहां हैं? आरोपी गिरफ्त में हैं, तो फोन क्यों नहीं मिला?
- चार महीने बाद सीबीआई ने एक और नार्को विश्लेषण करवाने की बात कही है। इस बार आरोपियों ने कुछ और कहा, तो कौन सा विश्लेषण सही माना जाएगा ? क्यों सीबीआई आरोपियों को बचाना चाहती है ?
- जिस ढंग से जज की हत्या हुई , यह साफ लगता है कि आरोपियों ने पहले रेकी की थी। लेकिन सीबीआई कहती है कि आरोपियों व किसी अन्य में हत्या से पहले कोई संपर्क नहीं हुआ, न रेकी हुई।
- पिछले साल 28 जुलाई को हुई इस घटना के कई महीनों बाद भी सीबीआई कोई निष्कर्ष नहीं दे सकी है, उसकी विश्वसनीयता पर हमें शक होता है। क्या वह इस मामले को हिट एंड रन में बदलना चाहती है?