दिल्ली के जीबी रोड पर सेक्स रैकेट के भंडाफोड़ में पकड़ा गया आफाक और उसकी पत्नी के बारे में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। मुरादाबाद के उझारी के लोगों को नहीं मालूम था कि खुद को प्रापर्टी डीलर बताने वाला आफाक बाकरी वास्तव में इंटरनेशनल सेक्स रैकेट का संचालक है और खुद एक कोठे वाली को ब्याह लाया है। पत्नी सायरा बेगम की हकीकत से पर्दा ने उठे इसके लिए आफाक ने अपने गांव में यही फैला रखा था कि उसने शादी ही नहीं की है। लेकिन उसकी गिरफ्तारी ने उसके सारे कच्चे चिट्ठे को खोलकर रख दिया।
आफाक बाकरी को बेशक पूरा इलाका मालदार लोगों में गिनने लगा हो लेकिन उसे अपनी हकीकत पता थी। यही वजह थी कि उसने सायरा बेगम से निकाह करने की बात को छ़पा रखा था। उसे पता था कि पत्नी को समाज के सामने लाया तो लोग सायरा का घर पता पूछेंगे और फिर धीरे - धीरे उसकी बात खुल जाएगी। दरअसल आफाक ने सेक्स की मंडी में पत्नी सायरा के जरिए ही कदम जमाए थे। इसके बाद वह इस गंदे धंधे में इतना तेज रफ्तार से दौड़ा कि जीबी रोड के ज्यादातर कोठों पर उसी का कब्जा हो गया।
खुद को प्रोपर्टी डीलर बताता था आफाक
सेक्स रैकेट
पत्नी सायरा बेगम के साथ मिलकर ही उसने पांच हजार से भी गरीब - मजबूर लड़कियों को ‘नरक’ में धकेला था। पुलिस पूछताछ में साफ हो चुका है कि आफाक और सायरा अभी तक पांच हजार से भी अधिक लड़कियों को कोठों पर बेच चुके हैं। आफाक बाकरी मूल रूप से अमरोहा में कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर के गांव उझारी का रहने वाला है। दिल्ली में जिस्मफरोशी के धंधे से अकूत दौलत कमा चुका आफाक अपने गांव और आसपास के इलाके में खुद को प्रापर्टी डीलर बताता था।
हसनपुर- संभल रोड पर हसनपुर से करीब दस किमी दूर है उझारी नगर पंचायत। सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर का गांव भी यही है। सड़क के दोनों ओर बसा यह गांव मुस्लिम बहुल है और शियाओं की भी यहां अच्छी खासी तादाद है। इसी गांव में एक गरीब घर में पैदा हुआ आफाक बाकरी पुत्र इकबाल हुसैन करीब 25 साल पहले रोजी रोटी की तलाश में गांव छोड़कर दिल्ली चला गया था। वहां उसने सेक्स रैकेट चलाना शुरू किया और पत्नी सायरा बेगम के साथ मिलकर इस रैकेट को दिल्ली एनसीआर के साथ ही नेपाल और कई अन्य छोटे - मोटे मुल्कों में भी फैला दिया। शक है कि उसने अमरोहा जिले की कई लड़कियों को भी इस नरक में झोंका।
सियासी जमीन की तलाश ने आफाक को पहुंचाया जेल
Sex racket
- फोटो : अमर उजाला
आफाक बाकरी ने जब जिस्मफरोशी के धंधे से अकूत दौलत जुटा ली तो उसे नेता बनने का चस्का लगा। समाज में एक मुकाम हासिल करने के लिए वह अपने गांव की ओर लौटा और उझारी के इर्दगिर्द सियासी जमीन बनाने लगा। पैसे की कमी नहीं थी लिहाजा आफाक बाकरी ने उझारी, हसनपुर और गजरौला में सियासी जमीन तलाशना शुरू कर दिया। वह त्यौहारों पर अपने फोटो - पोस्टर दीवारों पर चिपकवाने लगा। इसके अलावा धीरे - धीरे उसने सपा नेताओं से नजदीकियां बढ़ा लीं। वह सपा नेताओं के स्वागत कार्यक्रम करने लगा और उझारी से लेकर हसनुपर और गजरौला पर नेशनल हाईवे तक उसने होर्डिंग बैनर लगाने शुरू कर दिए।
राजनीति में एंट्री की जुगत भिड़ा रहे आफाक बाकरी ने अपनी बिरादरी यानी शियाओं में अच्छी खासी पैठ बना ली। सत्ता तक पहुंच बनाने के लिए उसने सपा के कई नेताओं से संपर्क साध लिया था। मंडल के एक कद्दावर सपा नेता से भी उसके नजदीकी रिश्ते बताए जा रहे हैं। हालांकि आफाक का कच्चा चिट्ठा उजागर होने के बाद अब सपाई सीधे तौर पर उससे पल्ला झाड़ रहे हैं। लेकिन पिछले दिनों आफाक की गतिविधियों से साफ है कि सपा में बड़े कद के नेता से भी उसके सीधे संपर्क रहे हैं। एक बड़ा नेता उसे राजनीति में एंट्री दिलाने के लिए फील्ड सजा रहा था। माना जा रहा है कि दो दशक से भी अधिक वक्त से दिल्ली में कोठे संचालित कर रहा आफाक नेता बनने की चाहत में ‘मारा’ गया। उसने सेक्स की मंडी से कमाई अकूत दौलत के बूते सियासी धुरंधरों का रास्ता काटने की कोशिश की और नतीजे में सलाखों में पहुंच गया।