फिल्म इंडस्ट्री में निवेश से मोटा फायदा मिलने का झांसा देकर लगभग 200 करोड़ रुपये हड़पने वाली फर्जी कंपनी के एक निदेशक को एसटीएफ ने सिविल लाइंस में गिरफ्तार किया है। उसके कार्यालय से लैपटॉप, कंप्यूटर, मोहरें, चेक आदि बरामद की गई हैं।
ठग गिरोह के चार अन्य लोगों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने लखनऊ में दफ्तर खोलकर कई राज्यों में हजारों लोगों को चूना लगाया। ठगे गए लोगों ने इस गैंग के खिलाफ इलाहाबाद और लखनऊ में केस लिखाए थे। एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट को लंबे समय से ऑनलाइन ठगी की शिकायत मिल रही थी।
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बृहस्पतिवार को एसटीएफ के इंस्पेक्टर अजय सिंह को सूचना मिली कि फिल्म इंडस्ट्री में निवेश करने पर भारी लाभ का प्रलोभन देकर ठगी करने वाली एक फर्जी कंपनी एम्परर मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ने सिविल लाइंस में ताशकंद मार्ग स्थित इंफ्रा प्राइवेट लिमिडेट की इमारत में कार्यालय खोल रखा है।
यह भी जानकारी मिली कि इस कंपनी के खिलाफ यहां सिविल लाइंस तथा लखनऊ के विभूति खंड थाने में धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हैं। एसटीएफ ने कार्यालय में छापा मारकर स्थानीय निदेशक ओमप्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया। वहां एक कंप्यूटर सेट, लैपटॉप, विभिन्न बैंकों के चेक, आठ रजिस्टर, पांच मोहरें, कंपनी के चार मुख्य संचालकों के व्हाट्स एप के स्क्रीन शाट भी जब्त किए।
फाइल
- फोटो : सांकेतिक चित्र
शहर में रसूलाबाद तेलियरगंज निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि वह कई साल से ऑनलाइन प्राइवेट कंपनियों में काम करता रहा है। उसकी मुलाकात बरेली जनपद के मोहम्मद असीर से हुई थी, जो उसे 14 मार्च को एम्परर मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कंपनी के सेमीनार में लखनऊ में फैजाबाद रोड स्थित रिसार्ट ले गया।
वहां कंपनी की डायरेक्टर हरियाणा की अनारा गुप्ता, नरेश शर्मा, प्रदीप शर्मा, वाराणसी के शत्रुघ्न टी सिंह तथा भोजपुरी के कई कलाकार मौजूद थे। दूसरे दिन उसे विभूति खंड में कंपनी मुख्यालय ले जाया गया। ओमप्रकाश के अनुसार उसे बताया गया कि यह कंपनी हिंदी और भोजपुरी फिल्में बनाती हैं। कंपनी को कई फिल्मों में पैसा लगाने पर भारी फायदा हुआ है।
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यह कंपनी फिल्मों में माफिया की बजाय आम लोगों से पैसों का निवेश कराती है। फिर लोगों को निवेश का लाभ दिया जाता है। कंपनी के संचालकों ने उससे कहा कि जितना पैसा लगाओगे, उसका छह प्रतिशत साप्ताहिक लाभ दिया जाएगा, साथ ही जोड़े गए लोगों के निवेश का भी 10 फीसदी लाभ उसे मिलेगा।
ओमप्रकाश ने यहां सिविल लाइंस के कार्यालय में काम शुरू कर दिया। वह कंपनी की एक मेल आईडी के जरिए लोगों को जोड़ने लगा। लोगों से मिले पैसे या चेक कंपनी के लखनऊ के अलग-अलग खातों में जमा कराए। मई से नवंबर के बीच ही उसने 1011 लोगों की आईडी बनाकर तकरीबन तीन करोड़ रुपये कंपनी के खातों में जमा कराए।