गाजियाबाद में पुलिस के पीछा करने पर एक लुटेरा बृहस्पतिवार तड़के न्यू लिंक रोड स्थित फ्लाईओवर से नीचे कूद गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उसके तीन साथी फ्लाईओवर से उतरकर भाग निकले। चारों बदमाश इंदिरापुरम के काला पत्थर के पास ऑटो सवार एक युवक से लूटपाट करने के बाद उसे तमंचे की बट मारकर भाग रहे थे।
पीड़ित ने बहादुरी दिखाते हुए लिफ्ट लेकर बदमाशों का पीछा किया और रास्ते में मौजूद पीआरवी को सूचना दी। पुलिस ने पीछा कर ऑटो सवार बदमाशों को घेर लिया। मूलरूप से एटा का रहने वाला देवेंद्र प्रताप सिंह, खोड़ा में भाई चंद्रपाल के साथ रहता है। बुधवार को ही उसकी जॉब नोएडा सेक्टर-63 की एक कंपनी में लगी थी।
बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे वह ऑफिस जा रहा था। खोड़ा पुश्ता से उसने ऑटो लिया, जिसमें चालक के अलावा तीन युवक पहले से सवार थे। ऑटो कुछ दूर ही आगे बढ़ा था कि तीनों युवकों ने उसकी कनपटी पर तमंचा लगा दिया और मोबाइल व एक हजार रुपये लूट लिए। विरोध करने पर मारपीट कर तमंचे की बट देवेंद्र के सिर में मारकर उसे घायल कर दिया और काला पत्थर के पास एनएच-24 पर ऑटो से नीचे फेंककर भाग निकले।
फाइल
युवक ने बहादुरी दिखाते हुए एक बाइक सवार से लिफ्ट मांगी और बदमाशों का पीछा शुरू कर दिया। बदमाश न्यू लिंक रोड से मेरठ तिराहे की ओर जा रहे थे। इस पर डीपीएस सिद्घार्थ विहार के सामने खड़ी प्रताप विहार की पीआरवी को देवेंद्र ने लूट की जानकारी दी। पीआरवी ने भी बदमाशों का पीछा शुरू कर दिया। बदमाश ऑटो लेकर मेरठ तिराहे से पहले फ्लाईओवर पर पहुंचे ही थे कि सामने से कोतवाली थाना क्षेत्र की एक पीसीआर वैन आ गई।
नों ओर से खुद को घिरता देख बदमाश ऑटो से उतरकर पैदल भागने लगे। तीन बदमाश फ्लाईओवर के रांग साइड से होकर नया बस अड्डा की ओर भाग निकले जबकि एक बदमाश ने फ्लाईओवर से साईं उपवन की ओर रेलवे ट्रैक के पास छलांग लगा दी। पुलिस जब तक नीचे उसे पकड़ने पहुंची, उसकी मौत हो चुकी थी। एसएचओ विजय नगर ने बताया कि मृतक बदमाश की उम्र करीब 20 साल है। उसकी शिनाख्त के प्रयास जारी हैं। बरामद ऑटो की मदद से फरार बदमाशों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
युवक ने दिखाई बहादुरी, पुलिस ने लापरवाही
देवेंद्र के सिर में बदमाशों ने तमंचे से वार किया तो उसके खून निकल आया। एनएच पर बदमाशों ने उसे ऑटो से फेंक दिया तो वह चोट की परवाह किए बगैर लिफ्ट लेकर बदमाशों के पीछे लग गया। उधर, पुलिस ने बदमाशों का पीछा तो किया मगर कोतवाली की पीसीआर को बदमाशों के बारे में सूचना तक नहीं दी गई। अगर कोतवाली की पीसीआर अलर्ट होती तो अन्य तीन बदमाश भी आसानी से पकड़े जा सकते थे।