देश की आर्थिक राजधानी मुंबई बॉलीवुड के साथ साथ अंडरवर्ल्ड और कुख्यात अपराधियों के लिए भी मशहूर रहा है। एक दौर में मुंबई में कई बड़े गैंगस्टर के नाम हुआ करते थे लेकिन वक्त के साथ-साथ पुलिस और सरकार की सख्ती बढ़ी और वो अपना वजूद खोते गए। लंबे समय तक मुंबई शांत रहा, लेकिन एक बार फिर मुंबई में क्राइम का नया मॉडल शुरू हुआ है।
पुलिस की नजरों में ये मॉडल उस समय आया जब इस महीने की शुरूआत में पुलिस की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने एक दुकानदार पर फायर करने के मामले में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। पुलिस की टीम उस समय हैरत में पड़ गई जब पूर्व में तीनों को कोई आपराधिक इतिहास नजर नहीं आया।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार पुलिस ने तीनों लोगों के बारे में खोजबीन शुरू की तो जो जानकारी निकलकर सामने आई तो वह अचंभे में पड़ गई। पकड़े गए आरोपियों में से एक सुधाकर क्रिस्टोफरिया (52) एक कैटरर है जो सूरत जेल के कैदियों के लिए खाने की आपूर्ति करता था।
उसका एक साथी राज च्वाहण (25) शहर के एक होटल में वेटर के तौर पर काम करता था जबकि उनका एक अन्य साथी कश्मीर निवासी 27 साल का अली अब्बास खान मुंबई की मायानगरी में स्ट्रगलिंग एक्टर है।
स्ट्रगलिंग मॉडल, वेटर, मॉडल और कैटरर बन रहे सुपारी किलर
पुलिस की जांच में पता चला कि इन तीनों में से ही किसी ने इस घटन से पहले कभी पिस्तौल भी नहीं पकड़ी थी, लेकिन गैंगस्टर सुरेश पुजारी द्वारा दस लाख रुपये देने का वादा करने के बाद वो जरायम की दुनिया में उतर आए।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह केस मुंबई अंडरवर्ल्ड से शार्पशूटर के खात्मे का संकेत तो है ही लेकिन यह अब ऐसे लोगों के उदय का भी संकेत दे रहा है जो अब गैंगस्टर की शह पर ठेके पर काम करने लगे हैं।
पुलिस के अधिकारी के अनुसार मुंबई क्राइम वर्ल्ड में अब शार्प शूटरों का भारी टोटा है इसलिए गैंग अब एक्सटार्शन और धमकी देने के लिए ऐसे लोगों को चुनने लगे हैं जो कैटरर्र, वेटर और हुक्का पार्लर में काम करते हैं। गैंगस्टरों की नजर में अब मायानगरी में संघर्ष करते छोटे मोटे एक्टर भी हैं, जो अपना खर्चा चलाने के लिए ऐसे कामों को अंजाम देने के लिए जल्दी तैयार हो जाते हैं।
ऐसे ही पकड़े गए एक युवा ने पुलिस को बताया कि वह किसी की जान लेना नहीं चाहते न ही किसी पर गोली चला सकते हैं उन्हें तो सिर्फ दहशत फैलाने का काम दिया जाता है और इसके लिए उन्हें दुकान या घर के बाहर फायर करने, कांच के दरवाजे पर फायरिंग करने आदि के काम दिए जाते हैं।
हवाई फायर के लिए भी गैंगस्टर दे रहे एक लाख रुपये
इस तरह की वारदात शिकार को दहशत में लाने के लिए की जाती है जिससे वह असानी से उगाही दे दे। इस काम के लिए युवाओं को अच्छी खासी रकम यहां तक की एक लाख रुपये तक दिए जाते हैं जिससे वह आसानी से तैयार हो जाते हैं।
ऐसे में बिना किसी को नुकसान पहुंचाए बस एक दो फायर करने के लिए एक दो लाख की रकम कोई भी नहीं छोड़ना चाहता। पुलिस ने ताजा मामले में तीनों व्यक्तियों को नालासोपारा और उल्हास नगर से गिरफ्तार किया।
ऐसे ही एक मामले में बीते अक्टूबर में पुलिस ने हनुमंत गायकवाड़ और राहुल लौंढे को गिरफ्तार किया था। दोनों पर एक बिल्डर सुमित चक्रबर्ती पर ऑफिस में फायरिंग करने का आरोप था। दोनों आरोपी युवक सोलापुर के रहने वाले थे और दोनों के ही पिता छोटे किसान थे।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे दोनों युवाओं को पैसे की जरूरत थी और इसी का फायदा गैंगस्टरों ने उठाया। हनुमंत गायकवाड़ से जब गैंगस्टर ने संपर्क किया तो उसे अपनी बहन की शादी के लिए पैसे की जरूरत थी और वो तुरंत तैयार हो गया। पुलिस का कहना है कि इस तरह से युवाओं का अपराध की दुनिया में जाना खतरनाक कदम है, पैसे का चश्का लगने पर ये ही पेशेवर अपराधी बन जाते हैं।