इससे पहले ट्रेनर ने कहा था कि उसके पास ऐसे ड्रिल करीने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से प्रमाणपत्र है। लेकिन मीडिया रिलीज के दौरान एनडीएमए ने कहा कि वह इस ड्रिल से जुड़े हुए नहीं थे। इस मामले में एनडीएमए शामिल नहीं है। साथ ही ऐसे ड्रिल कराने के लिए ट्रेनर को भी प्राधिकरण की ओर से अधिकृत नहीं किया गया था। एनडीएमए पर्याप्त तैयारी और सुरक्षा उपायों के बिना किसी भी ड्रिल को मंजूरी नहीं देता है।
आरोपी ट्रेनर 15 मई को अपने साथ एक लेटरहेड लेकर कॉलेज पहुंचा था। जिस पर एनडीएमए का लोगो था। पुलिस का कहना है कि वह कई कॉलेज में ड्रिल प्रोग्राम कर चुका है। वह खुद को आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा का ट्रेनिंग अफसर बताता है। उसके लेटरहेड पर एनडीएमए के दिल्ली स्थित ऑफिस का पता भी लिखा था। उसने पुलिस को बताया कि उसने यहीं से डिप्लोमा किया था और उसे शिक्षण संस्थानों में आपदा प्रबंधन के प्रोग्राम करवाने के लिए केंद्र द्वारा भुगतान किया जाता है।
मामले पर वरिष्ठ पुलिस अफसर का कहना है कि वह अरुमुगन के बैंक अकाउंट, एनडीएमए से जुड़े होने की बात, उसकी तनख्वा आदि की जांच कर रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी ने छात्रा की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग से उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है जिन्होंने बिना मंजूरी के लिए ड्रिल आयोजित की। उन्होंने पीड़िता के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी घोषणा की।