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नवविवाहित सौम्य शेखर को गिफ्ट बम भेजकर आखिर किसने मारा?

Sun, 25 Mar 2018 11:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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शादी के गिफ्ट में छुपे बम से एक नव-विवाहित सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत और उनकी पत्नी के गंभीर रूप से घायल होने ने एक छोटे से शहर की शांति पूरी तरह से भंग कर दी है। इस घटना के करीब एक महीने बाद भी पुलिस को सुराग का कोई पता नहीं चल सका है। बीबीसी ने ओडिशा का दौरा किया और इस पूरे घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश की जिससे समूचा भारत हिल गया है। शादी के पांच दिन बाद 23 फरवरी को ओडिशा के पाटनागढ़ में अपने नए बने मकान में 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर सौम्य शेखर साहू और उनकी 22 वर्षीय पत्नी रीमा रसोईघर में बातें कर रहे थे।

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वो खाने में ग्रिल बैंगन और दाल का झोल बनाने की योजना बना रहे थे तभी सौम्या को उनके मेटल गेट की कुंडी बजने की आवाज सुनाई दी। एक डिलिवरी मैन बाहर खड़ा था, अपने हाथ में सौम्य के नाम का पार्सल लिए। बक्से पर एक घिसे हुए स्टीकर पर लिखा था कि इसे एसपी शर्मा ने रायपुर (करीब 230 किलोमीटर दूर स्थित शहर) से भेजा था। रीमा रसोई घर में बॉक्स खोलते अपने पति को याद करती हुए कहती हैं, ''पार्सल को हरे कागज में कवर किया गया था जिसमें से सफेद धागा निकल रहा था। उसी वक्त पीछे से उनकी 85 वर्षीय दादी जेमामणि साहू पार्सल में क्या आया है यह देखने के लिए आईं।''

'सरप्राइज गिफ्ट'

सौम्य शेखर ने अपनी पत्नी से कहा, "यह शादी का गिफ्ट लगता है। मैं केवल यह नहीं जानता हूं कि इसे भेजने वाला कौन है। मैं रायपुर में किसी को नहीं जानता।" जैसे ही उन्होंने धागा खींचा, वहां बिजली जैसी कौंधी और रसोई में बहुत जोर का धमाका हुआ। तीनों इसके चोट के प्रहार से वहीं फर्श पर लुढ़क गए, उनके शरीर से तेजी से खून बहने लगा। इस घमाके से छत का प्लास्टर फट गया और वाटर प्यूरिफायर भी टूट कर बिखर गया। खिड़की भी टूट कर टुकडों में दूर जा गिरी और हरे रंग में रंगी दीवारों में दरार पैदा हो गई।
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तीनों दर्द से तड़पने लगे और खून पूरे फर्श पर पसर गया। जेमामणि साहू आग के लपेटे में घिर गई थीं। सौम्य शेखर ने बेहोश होने से पहले कराहते हुए कहा, "बचाओ, मुझे लगता है मैं मर रहा हूं।" ये वो आखिरी बार था जब रीमा ने अपने पति को बोलते हुए सुना था। आग ने उनके चेहरे और बांह को जला दिया। उनके फेफड़े में धुंआ भर गया और वो सांस लेने के लिए छटपटाने लगीं। उनके कान चुभने लगे, इसी वजह से वो यह साफ-साफ नहीं सुन सकीं कि उनके पड़ोसी यह पूछते हुए दौड़े चले आ रहे हैं कि कहीं गैस सिलेंडर तो नहीं फट गया। मलबा उनकी आंखों में भर गया और नजर धुंधली होती चली गई।

रेंग कर बेडरूम में पहुंची रीमा

इसके बावजूद रीमा बेडरूम तक रेंग कर पहुंचने में कामयाब रहीं और स्थानीय कालेज में प्रिंसिपल अपनी सास को कॉल करने के लिए फोन उठाया। लेकिन कॉल करने से पहले ही वो बेहोश हो गईं। इस धमाके के कुछ मिनट बाद के वीडियो फुटेज से पता चलता है कि परेशान पड़ोसी तीनों घायलों को बेडशीट में उठा कर बाहर खड़े एक एंबुलेंस में पहुंचा रहे हैं। सौम्य शेखर और जेमामणि साहू की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई, दोनों 90 फीसदी जल गए थे। रीमा सरकारी अस्पताल में बर्न वार्ड के एक तंग कमरे में धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं।

इस भीषण घटना को एक महीने से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन इस बात का कोई अता-पता नहीं है कि सौम्य शेखर को किसने मारा। रीमा के पिता सुदाम चरण साहू ने बीबीसी से कहा, "हम साधारण लोग हैं। न मेरा कोई दुश्मन है और न मेरी बेटी का। मेरे दामाद का भी कोई दुश्मन नहीं था। मुझे किसी पर शक नहीं है, मुझे नहीं पता ऐसा कौन कर सकता है।" सौम्य और रीमा की एक साल से कुछ पहले सगाई हुई थी। रीमा के पिता एक कपड़ा व्यापारी हैं जिन्होंने रीमा को अपने छोटे भाई से गोद लिया था क्योंकि उन्हें अपने दो बेटों के बाद एक बेटी चाहिए थी, और उनके भाई को तीन बेटियां थीं।

हंसमुख और प्यारी रीमा ने एक स्थानीय कालेज से ओडिया भाषा में स्नातक की पढ़ाई की। सौम्य शेखर के माता-पिता दोनों कालेज टीचर थे- उनके पिता जीव विज्ञान पढ़ाते थे। सौम्य ने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की थी और दो महीने पहले बंगलुरु में एक जापानी इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में जॉइन करने से पहले चंडीगढ़ और मैसूर में इंफो-टेक कंपनी में काम कर चुके थे।

एक अनजान फोन कॉल

सौम्य शेखर के पिता रबिंद्र कुमार साहू (57) ने कहा, "वे दोनों शादी से पहले अपने परिवार की उपस्थिति में एक दो बार मिले थे। दोनों बहुत खुश थे। कोई उन्हें क्यों मारना चाहेगा?" बस एक ही बेतुकी चीज है कि सौम्य शेखर जब बंगलुरू में थे तो उन्हें एक बार एक अनजान फोन कॉल आया था। "यह कॉल पिछले साल आया था, रीमा ने मुझे बताया था कि जब दोनों फोन पर बात कर रहे थे तभी सौम्य को वो कॉल आया था। और तब सौम्य ने रीमा को होल्ड पर रख कर उससे बात की और बाद में उन्हें बताया कि फोन पर उनको धमकाया गया। एक आदमी ने उन्हें धमकी देकर शादी नहीं करने को कहा था।"

"उसके बाद उन्होंने किसी अन्य कॉल का जिक्र नहीं किया था, इसी दौरान दोनों की शादी हो गई, हम उस कॉल के बारे में बिल्कुल भूल चुके थे।" इस हत्या को लेकर दो दर्जन जांचकर्ताओं ने चार अलग अलग शहरों में दोस्तों और रिश्तेदारों समेत 100 से भी अधिक लोगों से अब तक पूछताछ की है। उन्होंने मोबाइल फोन कॉल रिकॉर्ड खंगाले, लैपटॉप को स्कैन किया और इन नवविवाहितों के फोन भी खंगाले।

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cr
केवल यह पता है कि यह पार्सल रायपुर से भेजा गया था जिस पर गलत नाम और पता लिखा था। हत्यारे ने इसके लिए 400 रुपये खर्च किए और बड़ी सावधानी से कुरियर का चयन किया था। कुरियर कंपनी के दफ्तर में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था और पार्सल को स्कैन भी नहीं किया गया था। तीन बसों और चार हाथों से होते हुए पार्सल 650 किलोमीटर का सफर करते हुए 20 फरवरी को पाटनगढ़ पहुंचा। 
कुरियर कंपनी के स्थानीय मैनेजर दिलीप कुमार दास ने बताया, "डिलिवरी मैन उसी शाम को सौम्य शेखर के घर पहुंचा था, लेकिन पार्सल को बिना डिलीवर किए ही वापस लौट गया क्योंकि वहां रिसेप्शन पार्टी चल रही थी।" अंत में उसने तीन दिन बाद पार्सल को गेट पर डिलीवर किया। फोरेंसिक विशेषज्ञ अब भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह बम कितना शक्तिशाली था। जांचकर्ताओं का कहना है, यह जूट के धागे में लिपटा एक क्रूड बम था जिससे धमाके के बाद सफेद धुंआ निकला था।

हत्या का सुराग अब तक पुलिस के हाथ नहीं

सुरागों की कमी की वजह से जांचकर्ता हत्या के पीछे कई मंसूबों के होने पर ध्यान दे रहे हैं। क्या यह ठुकराए हुए प्रेमी का काम है? पुलिस के पास कोई सुराग नहीं है, लेकिन वो इस बात की भी जांच कर रही है कि सौम्य शेखर ने आखिर शादी से कुछ दिन पहले अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट कर नया अकाउंट क्यों बनाया। 

क्या यह साहू परिवार में प्रॉपर्टी को लेकर तो हत्या नहीं थी, जहां सौम्य शेखर एक मात्र असली वारिस थे? जांचकर्ता किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले कुछ और परिवार वालों से पूछताछ करना चाहते हैं। क्या इस हत्या का संबंध रीमा के माध्यमिक स्कूल के दौरान हुए एक विवाद से है जब एक सहपाठी ने उसे परेशान किया था और उसके माता-पिता ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की थी? इसकी संभावना नहीं लगती क्योंकि इस घटना को हुए छह साल बीत चुके हैं।

कब तक सुलझेगा हत्या का यह मामला?

इसके अलावा, बम को भेजने वाला इतनी आसानी से विस्फोटक के पार्सल को अपने टारगेट पर भेजने में कैसे कामयाब हुआ? क्या यह कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का मामला है? बलांगीर के सीनियर पुलिस अधिकारी शशि भूषण सतपथी कहते हैं, "यह एक बहुत ही जटिल मामला है। यह एक बहुत ही जानकार आदमी का काम है जो बम बनाने की कला से अच्छी तरह वाकिफ था।"

रीमा अब भी अस्पताल में हैं और जब सोमवार को उन्हें पुराने अखबारों से पता चला कि उस धमाके में उनके पति की मौत हो चुकी है तो वो रोने लगीं, उनके परिवार के एक सदस्य ने इस दृश्य को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया। करीब तीन हफ्तों तक उनके परिवार ने यह खबर उनसे छुपा कर रखी थी, वो बेतहाशा रो रही थीं।

वो रोते हुए अपने पापा पर चीख रही थीं, "आपने मुझसे झूठ बोला, आपने मुझे सच नहीं बताया।" शाम तक उनका रोता हुआ नितांत ही निजी वीडियो टीवी पर दिखाया जा रहा था। उनके पिता ने कहा, "हमने सोचा कि शायद यह जांच को आगे बढ़ाने और दोषी को गिरफ्तार करने का काम करेगा।" "बस हम सब यही चाहते हैं।"
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