मॉर्निंग वॉक पर निकला बुजुर्ग कभी लौट नहीं पाया
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वो पत्नी से झगड़ रहा था। उसके शोरशराबे से कॉलोनी वाले आजिज आ गए। उसे समझाया गया। लेकिन उसने उत्पात जारी रखा और लोगों की नींद हराम कर दी।
गुस्साए लोगों ने उसे दबोचा और बांधकर छोड़ दिया। भोर में किसी तरह उसने खुद को आजाद किया और पास के मंदिर से त्रिसूल उखाड़ लाया।
अब हाथ में भोले नाथ का त्रिशूल था, आखों में प्रतिशोध की ज्वाला, और सिर पर खून सवार। कॉलोनी में उसे जो सबसे पहले दिखा उस पर हमला कर दिया। धारदार ठंडा लोहा सीधे पेट में धंसा और अंतड़ियों के पार हो गया। इस हमले से बुजुर्ग की मौत हो गई।
विचलित करने वाली ये हृदयविदारक वारदात यूपी के गोरखपुर की है। इंतकाम की आग में सुलगते हुए एक रिक्शा चालक ने उस बुजुर्ग की जान ले ली, जो भोर की पहली किरण को देखने निकला था। सुबह की ताजी हवा फेफड़ों में भरने निकला था।
सुबह टहलने निकला था बुजुर्ग, फिर नहीं लौटा
इंतकाम की आग में रिक्शेवाले ने ली बुजुर्ग की जान
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चश्मदीदों के मुताबिक गोरखपुर के खोराबार तारामंडल इलाके में वारदात को अंजाम दिया गया। 65 वर्षीय रामधारी मौर्या रिक्शा चालक के हमले का शिकार बने। रामधारी रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी थी। रोजाना की तरह वो सोमवार सुबह भी सुबह टहलने निकले थे। तभी मूल रूप से बिहार के रहने वाले रिक्शा चालक ने उन्हें निशाना बनाया।
आरोपी ने बुजुर्ग के अलावा और भी लोगों पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। भारी मशक्कत के बाद लोगों ने उसे दबोच लिया और मरम्मत कर पुलिस के हवाले कर दिया।
पूरी वारदात से साफ होता है कि पहले स्थानीय लोगों ने कानून को हाथ में लिया और फिर रिक्शा चालक खुद में ही कानून-अदालत हो गया। इस वारदात से सबक लेने की जरूरत है। फिलहाल मामला और आरोपी पुलिस के हवाले हैं। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।