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पापा, आपकी आंखों में आंसू क्यों ? घर वालों को रुला रहे हैं नवनीत के आखिरी बोल

Fri, 22 Sep 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोरखपुर
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Navneet
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पापा...आपकी आंखों में आंसू क्यों हैं। हम तो ठीक हैं। मम्मी कहां हैं, उन्हें बुलाइए। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझते नवनीत के ये आखिरी बोल घरवालों को रुला रहे हैं।
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नवनीत ने कुछ कविताएं भी लिखी हैं जो जितनी संवेदनशील हैं उससे कहीं अधिक उसमें जीवटता की झलक मिलती है। तभी तो जिंदगी के आखिरी पल में भी वह भावुक पिता को ढांढस बंधाने में लगा था।

पढे़ं: आखिर नवनीत कहां से पाया जहर

अपने नाती को खोने के गम में बदहवास बाबा हरिराम प्रसाद अस्पताल के आखिरी पलों को याद कर फफक पड़े। घर के चिराग बुझने के सदमे ने उन्हें तोड़ दिया है। उनकी मनोस्थिति कुछ ऐसी है कि हर वक्त वह नवनीत के ख्यालों में डूबे हैं।
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कभी अखबारों में छपी खबरें पढ़कर तो कभी नवनीत की किताबें और अंक पत्र दिखाकर वह रो पड़ रहे हैं। उन्हें यकीन नहीं हो पा रहा है कि बहादुरी और जिंदादिली की बातें कहने वाले नवनीत ने आत्मघाती कदम कैसे उठा लिया।

वो कभी डीएम तो कभी पीएम बनने की बात करता था। बिलखते हुए हरिराम ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में तीसरे दिन उसकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ। उस समय उसके पापा सिराहने बैठे थे।

पापा की आंखों में आंसू देखकर भी वह टूटा नहीं था। उसके बुलाने पर जब मां आई तो वह उन्हें पहचान नहीं सका। मां को दादी कहकर धीरे से पुकारने लगा। जैसे उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा रहा हो। इसके बाद वह कुछ नहीं बोला। उसकी यही खामोशी मौत का रूप अख्तियार कर गई।

‘दीदी, जहर खाने पर कितने देर में मरते हैं’

Navneet
आत्मघाती फैसला उठाने से पहले नवनीत काफी उलझन में था। बहन, सोनम की मानें तो जहर खाने से तीन दिन पहले उसने पूछा था, दीदी ये बताओ कि जहर खाने के कितने देर में मरते हैं।

सोनम ने ये बातें अपनी मां से भी साझा की थीं कि लेकिन घरवालों ने बचकानी बातें समझकर इसे हल्के में ले लिया। अगर उस समय नवनीत की उलझन समझने की कोशिश की गई होती हो शायद वह सबके बीच होता।

सोनम ने बताया कि 15 सितंबर को घर पर कोई नहीं था। स्कूल से लौटने के बाद मैंने नवनीत को खाना दिया। खाना खाने के बाद उसके गले में जलन होने लगी। वह बोला, उल्टी होने वाली है। उसकी बिगड़ती तबियत देख पड़ोस के अंकल को बुलाया।

इसके बाद उसे हम लोग बशारतपुर में डॉ. धर्मेंद्र राय की क्लिनिक पर ले गए। वहां छह घंटे इलाज चला पर तबियत में सुधार नहीं हो सका। तब तक पापा, मम्मी और रिश्तेदार भी आ चुके थे। इसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। तब तक नवनीत अचेत हो गया था।
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संवेदनाओं को झकझोरती हैं नवनीत की कविताएं 

Navneet Suicide Note
राणा का चेतक, झांसी की रानी...जैसी वीरों की गाथाएं नवनीत की लेखनी में शामिल थीं तो खुली आंखों से एक सपना सा देखा...जैसी उसकी कविताएं संवेदनाओं को झकझोरती हैं।

छोटी सी उम्र में देश की खुशहाली और सबकी होठों पर मुस्कान बिखरने वाली नवनीत की कविताएं बहुत कुछ कहती हैं। उसकी हर लाइन के अलग मायने हैं। पढ़ने में होनहार नवनीत निजी जिंदगी में भी खुद को बड़े सलीके से रखता था। चित्रकारी भी उसके हुनर में शामिल थी।
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