आरोप है कि 24 मई 2017 की रात 11 बजे के करीब विक्रमादित्य वर्मा ने महिला को फोन करके अपने आवास पर बुलाया। महिला के पति को मामले की सूचना देने की बात कहने पर उन्होंने फोन रख दिया और नाराज होकर उसका तबादला बस्ती करा दिया।
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आरोप है कि दस नवंबर को बस्ती से ड्यूटी करने के बाद वह अपने पति के साथ शाम पांच बजे विक्रमादित्य वर्मा के आवासीय कार्यालय पर गई तो उन्होंने पति को कार्यालय से बाहर कर उसके साथ मनमानी करने लगे। पति ने किसी तरह उसे बचाया।
दूसरी ओर बंदोबस्त अधिकारी विक्रमादित्य वर्मा का कहना है कि आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। महिला कर्मी अपने पति के साथ दस नवंबर को उनके सरकारी आवास में घुस कर उन्हें मारापीटा था। इस मामले में उन्होंने दोनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। उसी आरोप में बस्ती में तैनात वह महिला कर्मी निलंबित कर दी गई थी।