परिवार था शादी के खिलाफ
इसके करीब एक साल बाद आथिरा ने अपने माता पिता को दोनों के रिश्ते के बारे में बताया। कयोंकि ब्रिजेश पिछड़ी जाति का था इसलिए आथिरा के परिवार के सभी लोग इस शादी के खिलाफ थे। आथिरा अपने फैसले पर अडिग रही। ब्रिजेश का कहना है कि आथिरा की मां सुनीथा दोनों के रिश्ते का समर्थन कर रही थीं लेकिन उसके पिता किसी भी हालत में दोनों को एक नहीं होने देना चाहते थे। ब्रिजेश ने आगे बताया कि राजन ने कई बार उसे फोन पर धमकी दी थी और कहा था कि वह उसे और आथिरा को एक नहीं होने देंगे। साथ ही वह आथिरा को भी घर में मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे।
इन्हीं धमकियों के बीच दोनों ने
शादी करने का फैसला किया। 16 मार्च को ब्रिजेश 45 दिनों की छुट्टी पर आया था। उसने फैसला किया था कि शादी के बाद वह आथिरा को अपने साथ यूपी ले जाएगा। इसी बीच आथिरा ने अपने पिता के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसके पिता उसे प्रताड़ित करते हैं। बिजेश ने बताया कि फिर 17 मार्च को पुलिस ने मल्लपुरम के लोकल पुलिस स्टेशन में राजन को बुलाया। जहां राजन ने लिखित स्टेटमेंट दी थी और कहा था कि वह वादा करता है कि वह 23 मार्च को होने वाली शादी में दोनों को परेशान नहीं करेगा।
पुलिस से मांगी थी मदद
आथिरा ने पुलिस को कहा था कि वह सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है। इसलिए वह शादी से पहले अपने पिता के घर नहीं जाना चाहती। लेकिन पुलिस ने उसके पिता के स्टेटमेंट के आधार पर आथिरा को आश्वासन दिया। जांच अधिकारी शाइजु एनबी ने दोनों पक्षों को सुलह के लिए बुलाया भी था जिसमें राजन ने दोनों की शादी को रजामंदी दे दी थी। साथ ही आथिरा ने यह भी कहा था कि वह ब्रिजेश की सुरक्षा के लिए भी चिंतित है लेकिन उसके पिता के लिखित स्टेटमेंट के बाद पुलिस ने उसे आश्वासन दिया था कि उसके पिता कुछ नहीं करेंगे।
आथिरा के कजिन आबीश कुमार का कहना है कि परिवार ने राजन को मनाने की पूरी कोशिश की पर वह नहीं मान रहे थे। वह यह सोच नहीं सकते थे कि उनकी बेटी की शादी किसी दलित के साथ हो। जबकि आथिरा की मां और राजन की भी लव मैरिज ही हुई थी।
आथिरा की मौत के बाद ब्रिजेश पूरी तरह टूट चुका है। उसका कहना है कि क्या हम
दलितों को प्यार करने का कोई हक नहीं है? क्या हम अपनी पसंद के लोगों के साथ नहीं रह सकते?