लड़की ने आगे बताया कि उसके बाद वह चिल्लाई तो वहां मौजूद अन्य यात्री उसकी सहायता के लिए आ गए। लेकिन ट्रेन स्टेशन से आगे निकल चुकी थी। फिर उसने पुलिस को प्लैटफॉर्म नंबर दो पर आने को कहा। साथ ही उसने बताया कि उसने करीब एक महीने पहले भी गार्ड को ऐसे इशारे करते हुए देखा था।
इसके बाद जीआरपी और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) कर्मियों ने प्लैटफॉर्म नंबर एक पर इंतजार करने का फैसला किया। वह थाणे से आने वाली गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। शाम के 5:37 पर जब ट्रेन लौटी तो लड़की ने
पुलिस को आरोपी को पकड़ने को कहा। लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ने से मना कर दिया। इसके बाद सिन्हा अपना मुंह छिपाने की कोशिश करने लगा।
इसलिए नहीं पकड़ा पुलिस ने
पुलिस ने उसे उसकी शिफ्ट खत्म करने के बाद पकड़ने का फैसला लिया और ड्यूटी पूरी करने के लिए जाने दिया। सरकारी रेलवे पुलिस के डिप्टी कमीश्नर समाधान पवार का कहना है कि उन्होंने गार्ड को उसी समय इसलिए गिरफ्तार नहीं किया क्योंकि ऐसा करने से ट्रेन की सेवाओं में विलंब आ सकता था। लेकिन उसकी पहचान की जा चुकी थी। साथ ही उसके खिलाफ आीपीसी की धारा 354 (ए) (यौन उत्पीड़न) का मामला दर्ज किया गया है।
आरोपी हुआ फरार
इसके बाद मंगलवार को ही जब अधिकारी सिन्हा के घर पहुंचे तो उसके घर में ताला लगा हुआ था। जिसके बाद वह
फरार हो गया और पुलिस उसे नहीं पकड़ पाई।