भारत के युवाओं को नशे के दलदल में झोंकने के लिए नेपाल से भेजी गई 100 किलो चरस पकड़ी गई। जब्त की गई इतनी चरस की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में करीब एक अरब रुपए बताई जा रही है। नेपाल पुलिस ने यहां के मकवानपुर में तस्करों को दबोच लिया और गाड़ी में भरकर भेजी जा रही चरस को जब्त कर लिया। चरस तस्करी के आरोप में दो आरोपी भी दबोचे गए हैं। चौकाने वाली बात ये है कि गाड़ी चालक के अलावा तस्करी का दूसरा आरोपी पेशे से नेपाल स्थित एक स्कूल का प्रबंधक है।
पुलिस के मुताबिक चरस की खेप से लदी गाड़ी नेपाल के मकवानपुर से यूपी के महाराजगंज के सोनौली से सटी सीमा को पार कर पाती, इससे पहले ही तस्करी को विफल कर दिया गया।
नेपाल पुलिस के मुताबिक सूचना मिली थी चरस की एक बड़ी खेप मकवानपुर से सोनौली भेजी जानी है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और संदिग्ध इलाके में मोर्चा संभाल लिया। तभी बीरता इलाके में पुलिस को संदिग्ध जीप दिखी, पुलिस ने गाड़ी रोककर तलाशी ली तो होश फाक्ता हो गए। इतनी भारी मात्रा में चरस मिलने का पुलिस को भी अंदाजा नहीं था।
पुलिस के मुताबिक जीप के ऊपरी हिस्से में अलग से बने केविटी में 100 पैकेटों में छिपाकर चरस को रखा गया था।
'10 वर्षों से कर रहा था चरस की तस्करी'
तस्करी के आरोप में दो दबोचे गए
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मौके से ही पुलिस की गिरफ्त में आए तस्करी को अंजाम देने वाले आरोपी ड्राईवर ने अपना नाम दिल बहादुर बताया। आरोपी ने ये भी बताया कि सोनौली सीमा तक चरस पहुंचाने के लिए उसे 45 हजार रुपए देने का वादा किया गया थी। ड्राईवर से पूछताछ में पता चला कि तस्करी का मास्टर माइंड कोई और नहीं, नेपाल के एक स्कूल का एक प्रबंधक है।
पुलिस के मुताबिक मकवानपुर के मनहारी बाजार स्थित यूनिवर्सल बोर्डिंग स्कूल के प्रबंधक शरण कुमार ने ही चरस की खेप भारत के लिए रवाना की थी। पुलिस ने आरोपी प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की मानें तो पूछताछ में आरोपी ने कबूला है कि बीते 10 वर्षों से चरस तस्करी में लिप्त था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।