गेहूं के साथ घुन पीसने की कहावत तो आपने सुनी होगी। पंखियों के गांव अंगूरी टांडा के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। जानिए महिलाओं और बच्चों को पुलिस ने थाने में क्यों बंद किया ?...
घटना उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की है। डकैतियों की ताबड़तोड़ वारदातों से बौखलाई पुलिस ने अंगूरी टांडा गांव में दबिश दी। पुलिस ने घुमंतू जनजाति के लोगों के साथ कई छात्र और ऐसे नाबालिगों को भी पकड़ लिया जिनके परिवार का अपराध से कोई लेनादेना नहीं है।
पीड़ित लोग तंग हवालात में चार दिन से ये यातनाएं भुगत रहे हैं। हवालात में बंद अमन अंगूरी टांडा के ही जूनियर हाईस्कूल में कक्षा आठ का छात्र है। उसका रिश्तेदार ताजीम भी बंद है। वह लाल फाटक के निजी विद्यालय में दसवीं का छात्र है।
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बाइस बरस का शामीन बैंडबाजा बजाता है तो सोलह साल का अलीम बैंड की बग्गी चलाता है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। परिवार उसी की कमाई से चलता है। सत्रह साल का साहिल तांगा चलाकर परिवार पालता है।