तमिलनाडु के तूतीकोरिन में हुई हिंसा की जांच के लिए 23 लोगों की टीम लगाई गई थी। यह हिंसा 22 और 23 मई को हुई थी जिसमें बहुत से लोग पुलिस फायरिंग में मारे गए। जांच दल ने हिंसा पर एक रिपोर्ट सौंपी है, इस रिपोर्ट का नाम 'टोटल ब्रेकडाउन बाय सिविलियन अथॉरिटी' रखा गया है।
जहां पहले बताया जा रहा था कि इस हिंसा में 13 लोगों की जान गई है। वहीं इस रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंसा में 15 लोगों की जान गई है। 260 पेज की इस रिपोर्ट में उन मौतों को अन्यायपूर्ण और अवांछित हत्याएं बताया गया है। रिपोर्ट के जारी होने के बाद हाई कोर्ट के जज डी हरीपरनथमन का कहना है कि पुलिस फायरिंग के दौरान पुलिस ने अपना आंतकी शासन जारी रखा। जांच टीम ने बताया कि शासन करने वाले सारे लोगों ने 22 मई को खुद को अनुपस्थित बताया और सारी ताकत पुलिस को सौंप दी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुलिस ने भीड़ को अलग थलग करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि एफआईआर के तहत हिंसा के दौरान हुई सभी मौतों को हत्या के तौर पर ही देखा जाएगा। रिपोर्ट पर सेवानिवृत आईएएस अफसर क्रिस्टोदास गांधी ने पुलिस को अनियंत्रित, उपद्रवी और नेताहीन भीड़ बताया।
वहीं जांच टीम के एक सदस्य ने बताया कि बहुत से लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट मानव अधिकार फोरम को अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सौंप दी गई है। साथ ही उन्हें जल्द से जल्द मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा गया है। बता दें कि तूतीकोरिन में स्टरलाइट प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 15 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल भी हुए थे।