पुलिस के रिकॉर्ड में सात महीने पहले नवविवाहिता का अपहरण कर हत्या करने का मामला दर्ज है। लेकिन उसका ना अपहरण हुआ और ना ही हत्या हुई। वो अपने फेसबुक फ्रेंड के साथ भाग गई थी। यह चौंकाने वाली खबर इलाबाद से सामने आई है। करीब सात महीने पहले झूंसी से जिस नवविवाहित युवती के लापता होने पर ससुरालियों को अपहरण और हत्या में फंसाया गया था, उसे पुलिस ने दिल्ली में फेसबुक फ्रेंड के साथ बरामद कर लिया है।
वह मायके से विदाई के एक रोज पहले रात में अपने फेसबुक फ्रेंड संग भाग गई थी। उसका दोस्त दिल्ली से उसे भगाने यहां आया था। तब से वह उसके साथ हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में थी। पिता को मालूम था कि वह खुद भागी है, मगर यह बात छिपाकर ससुरालियों पर झूठा केस लिखाया गया था। आवास विकास कॉलोनी झूंसी निवासी सीडीए पेंशन के रिटायर कर्मचारी रामचंद्र पांडेय ने बेटी अनुपमा का ब्याह पिछले साल बलिया जनपद में बहुआरा बैरिया निवासी अक्षयवर नाथ पांडेय के बेटे अमरजीत के साथ किया था। अमरजीत भोपाल स्थित भेल में इंजीनियर है।
कुछ समय पति के साथ रहने के बाद वह मायके लौटी तो फिर वह वापस जाने के लिए तैयार नहीं थी। 22 जनवरी को उसकी विदाई होनी थी, लेकिन उसके पहले ही रात में वह लापता हो गई। छह फरवरी को पिता रामचंद्र ने उसके ससुर और पति के खिलाफ केस दर्ज कराया कि विदा कराने के बाद अनुपमा को मारकर लाश गायब कर दी। पुलिस दहेज हत्या का केस लिखकर जांच कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को इलेक्ट्रानिक सर्विलांस से पता चला कि अनुपमा का पुराना नंबर बंद हो गया, लेकिन उसी मोबाइल फोन में नया सिम लगाकर दिल्ली में एक्टीवेट किया गया है। पुलिस ने इसी सुराग के सहारे नई दिल्ली जाकर बुधवार को निहाल विहार इलाके के अमनपुरी में अनुपमा को बरामद कर लिया।
फेसबुक पर हुई थी दोनों की दोस्ती
फाइल
फेसबुक पर हुई थी दोनों की दोस्ती
सीओ दारागंज आदेश कुमार त्यागी ने बताया कि अनुपमा हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जनपद के अश्विनी कुमार के साथ किराए के कमरे में थी। खुद अनुपमा ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल से फेसबुक पर अश्विनी से उसकी दोस्ती है। वे दोनों बातें करते रहते थे। उसकी शादी कर दी गई, लेकिन वह अश्विनी को भुला नहीं पा रही थी।
इसी वजह से उसने विदाई से एक रोज पहले अश्विनी को फोन किया और कहा कि वह आकर उसे अपने साथ ले चले। अश्विनी कार से आया। रात में वह उसके साथ भागकर लखनऊ गई। वहां से दोनों दिल्ली और फिर कांगड़ा चले गए। अश्विनी ने उसे करीब तीन महीने कांगड़ा में अपने घर से अलग एक कमरे में रखा। फिर दिल्ली आया और अपने दोस्त दीपक की मदद से किराए पर कमरा लेकर निजी फर्म में नौकरी करने लगा। अगर अनुपमा ने अपने पति से गिफ्ट में मिले मोबाइल में ही दिल्ली में दूसरा सिम न लगाया होता तो शायद पुलिस के लिए उसका पता लगा पाना संभव नहीं होता। सिम दोस्त दीपक की आईडी से खरीदा था।
डायरी में लिख गई थी, पिता ने छिपा लिया
सीओ आदेश त्यागी के मुताबिक, अनुपमा ने फेसबुक फ्रेंड के साथ भागने से पहले डायरी में लिख दिया था कि वह अपनी मर्जी से जा रही है। इसके लिए कोई परेशान न हो, मगर पिता ने जानते हुए भी यह बात पुलिस को नहीं बताई। इसके अलावा, मुकदमे में लिखाया कि ससुर और पति ने विदाई के बाद हत्या की जबकि वे विदा कराने आए ही नहीं। उस दिन ससुर अक्षयवर की लोकेशन की लोकेशन बलिया में ही थी। झूठा केस लिखाने पर अनुपमा के पिता पर कार्रवाई की जाएगी।