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ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में नदियों की सुरक्षा पर सम्मेलन, युवा पीढ़ी ने ली शपथ

Tue, 27 Feb 2018 06:37 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में आज वैज्ञानिकों, अधिकारियों और हजारों छात्र-छात्राओं ने उत्तराखण्ड की नदियों को बचाने की शपथ ली। ये मौका था उत्तराखण्ड राज्य के जल स्त्रोतों की दशा पर आयोजित राज्य विज्ञान एवं  प्रौद्योगिकी  सम्मेलन  का।

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सम्मेलन के पहले दिन  ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) कमल घनशाला ने अपने बचपन को याद करते  हुए कहा कि, जब वे पांच वर्ष के थे तो बरसात के मौसम में अक्सर रिस्पना नदी में बाढ़ आने की खबरें हुआ करती थी। रिस्पना, जिसका  पौराणिक  नाम ऋषिपर्णा है आज सिर्फ एक बरसाती  नाले में  सिकुड़ चुकी है। यही हालत  कुमाउं क्षेत्र की कोसी नदी और राज्य के अन्य नदी नालों की भी  हो चुकी  है। कर्नाटक के वाडगाम क्षेत्र में सूखे पड़े एक ताला बकोराज्य की लेक डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा  पुर्नजिवित  करने  का उदाहरण देते  हुए प्रो. घनशाला ने कहा के राज्य के जल स्त्रोतों को बचाने और पुर्न जिवित करने के लिए ऐसे ही कदम उठाने की आवश्यकता है। 

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी  चिदानन्द स्वामी मुनी जी ने कार्यक्रम को  मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित  करते  हुए कहा  कि  आज  विश्वभर  में  तकरीबन  बीस  प्रतिशत  लोगों के पास पीने  का  साफ पानी  नहीं  है और  करीब 1200 से 1600 बच्चे हर वर्ष पानी की कमी या प्रदूषित पानी  पीने के कारण  मरते  हैं।  नदियों के किनारे लोगों के शौच करने के कारण  प्रदूषित  हो  रहे  पानी  का  मुद्दा  उठाते  हुए उन्होंने कहा  कि  मन्दिर  बनाने  से  ज्यादा जरूरी ग्रामीण क्षेत्रों  में शौचालय बनाना  है। आज  हमें  रिस्पना  को  गंगा  बनाने की जरूरत है। चिदानन्द ने कहा कि युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र में अपना योगदान  देना  चाहिये । उन्होंने संगोष्ठि  में उपस्थित सभी  वैज्ञानिकों,  अधिकारियों  और  हजारों  छात्र-छात्राओं को राज्य और देश की नदियों को बचाने की शपथ भी दिलाई। 

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इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय और ग्राफिक एरा  पर्वतीय विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया है। यूसर्क के निदेशक डा. दुर्गेश पन्त ने कहा  कि  इस  दो  दिवसीय सम्मेलन की खास बात ये है  कि  इसमें हर क्षेत्र के लोग प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने  कहा  कि  वैज्ञानिकों, अधिकारियों  और  हजारों  छात्र-छात्राओं के साथ-साथ राज्य के प्रत्येक ब्लॉक  से  सरकारी अध्यापक भी  इस सम्मेलन  में  हिस्सा  ले  रहे  हैं।

अमरिकी दूतावास के प्रतिनिधि स्टुअर्ट डेविस ने कहा कि ग्राफिक एरा द्वारा आयोजित यह विज्ञान प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के जल स्त्रोतों को पुर्नजिवित करने  की  दिशा में एक नवीन प्रयास  है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विश्व भर में साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में कार्य  किए जा  रहे  हैं ,  उसी तरह जल स्त्रोतों को बचाने और पुर्न जिवित करने के क्षेत्र में भी काम करने चाहिये। 

वर्ल्ड ब्लाइन्ड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष महन्तेशने कहा कि अगर हमारी टीम आंखे न होने के बावजूद पाकिस्तानी टीम को हरा सकती है तो आज के लिए हुए संकल्प से हम उत्तराखण्ड की सूखती  हुई नदियों को भी बचा सकते हैं। सेना की ईको टास्क फोर्स के कमाण्डेन्ट कर्नल एच. आर. सिंह राणा ने युवा शक्ति से प्रदेश की नदियों को बचाने का  आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति बहुत बड़ी ताकत है और इसका प्रमाण है हाल ही में राज्य द्वारा गठित की गई कोसी रीवर रीजुवेनेशन कमेटी। 

रिस्पना, कोसी और नैनीझील के पुर्नजीवन विषय पर हुए विशेष सत्र में कुमाउं यूनिवर्सिटी के डॉ. जे. एस. रावत, चारू सी. पन्त, डॉ. हरीश बहुगुणा, इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्वाइल एण्ड वाटर कन्जर्वेशन के प्रिंसीपल साइंटिस्ट डॉ. डी. आर. सेना, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयनज्योलॉजी  के साइंटिस्ट डा. एस. के. भरतरिया, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी  रूड़की के डॉ. आर. पी. पाण्डे,  सेन्ट्रल ग्राउंड  वाटर बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर अनुराग खन्ना, स्याही  देवी  विकास  समिति  कोसी के चीफ एडवाइजर गजेन्द्र  पाठक  और  मैड एन.जी.ओ. के संस्थापक अभिनय ने प्रस्तुतियां दी।

कार्यक्रम में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एल. एम. एस. पालनी  और  ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय जसोला उपस्थित रहे।
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