बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि आज हर तरफ कुतर्क गढे़ जा रहे एकतरफा संवाद चल रहा है। गांधी के देश में एकतरफा संवाद नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि एक बार फिर से हम लोगों को गांधी जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। पटना में चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए नीतीश ने कहा कि गांधी जी को केवल नोटों में छाप देने से कुछ होने वाला नहीं है, आज जरूरी है उनके सिद्धांतों, उनके विचारों को आत्मसात करने की।
उन्होंने कहा कि हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत गांधी का विचार है। हम न्याय के साथ विकास की बात कहते हैं। नीतीश ने कहा कि चंपारण में बापू ने एक समाज सुधार की मुहिम भी शुरू की थी। बापू का मानना था कि समाज में सुधार किए बगैर देश और राज्य का विकास संभव नहीं है। शराबबंदी के बाद हमारी अगली कोशिश दहेज मुक्त बिहार बनाने की होगी। बिहार को दहेज मुक्त करने के साथ ही बाल विवाह पर भी रोक लगाने को लेकर काम जारी है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने कहा कि संत और महात्माओं की कुल परंपरा नहीं होती। गांधी का भी कोई कुल परंपरा नहीं है, उनका प्राकृतिक परिवार से ही हम भी आते हैं। गोपाल ने कहा कि बिहार हमेशा अंधेरे में रोशनी देने का काम किया है, लेकिन आज देश में प्रकाश के बीच अंधेरा है। जो रोशनी हमें बड़ी मुश्किल से मिली थी, वो हमसे छीनी जा रही है। आज हम पर जबरन कानून थोपा जा रहा है, गांधी इसी के खिलाफ थे। मैं बिहार से उम्मीद करता हूं कि वो एक बार फिर रोशनी लेकर देश के सामने आएगा।
गांधी विकास को प्रकृति संरक्षण के दायरे में देखते थे: पाटेकर
प्रतीकात्मक फोटो
भूमि अधिग्रहण कानून की आलोचना करते हुए गांधी के पोते ने कहा कि आज उस लड़ाई को फिर से लड़ने की जरूरत है जो कभी राजकुमार शुक्ल जैसे लोगों ने लड़ी थी। उन्होंने मनरेगा के लिए आधार को अनिवार्य बनाने की पहल का विरोध भी किया। गांधी ने कहा कि वो आज तक नारा नहीं लगाए हैं ना किसी को नारा लगाने के लिए कहा है, लेकिन आज वो राजकुमार शुक्ल की जय का नारा लगा रहे हैं और लगाने की अपील भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शुक्ल, राजेंद्र प्रसाद और जेपी जैसे लोग आज हमें ललकार रहे हैं। चंद्रशेखर धर्माधिकारी ने कहा कि आज हर कोई सत्याग्रह कर रहा है। सड़क जाम से लेकर बाजार बंद तक को सत्याग्रह का नाम दिया जा रहा है। सत्याग्रह के नाम पर आज दुराग्रह हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिसके अंदर सत्य नहीं हो वो कभी सत्याग्रह नहीं कर सकता है। गांधी में इतना नैतिक बल था कि वो स्वीकार करते थे कि उन्होंने कानून तोड़ा है और उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए।
मेधा पाटेकर के कहा कि गांधी विकास को प्रकृति संरक्षण के दायरे में देखते थे। आज केवल गंगा की बात हो रही है, बाकी नदियों की बात कोई नहीं कर रहा है। मेधा ने कहा कि बिहार में शराबबंदी का फैसला अच्छा है, लेकिन गुजरात की तरह होम डिलेवरी न हो यह देखना जरूरी है। सभा को रजी अहमद, राजेंद्र सच्चर, सच्चिदानंद, टी सुब्बा राव, तेजस्वी यादव, अशोक चौधरी ने भी संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि ये समारोह एक साल तक चलेगा और 20 अप्रैल, 2018 को इसका समापन होगा। राज्य सरकार के इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी आएंगे।