ऐसी ही औरतों के अनुभवों ने मुझे असहाय महिलाओं के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया। यदाद्री जिले की बुनकर महिलाओं से मिलने पर मुझे पता चला कि उनकी बुनी साड़ी, जिसकी लागत कीमत एक हजार से पांच हजार के बीच होती है, वह कैसे शॉपिंग मॉल में कम से कम बीस हजार रुपये की बेची जाती है। ऐसी ही महिलाओं के लिए मैंने योजना बनाई है कि मैं इन्हें वह रास्ता दिखाऊं, जो उन्हें बड़े बाजार की ओर ले जाए, ताकि उन्हें अपनी मेहनत की सही कमाई मिल सके।
मुझे पता है कि इन महिलाओं के पास इतने पैसे नहीं है कि वह शहर तक जाकर किसी स्टॉल पर अपना माल बेच सकें, इसलिए मैं इनके आने-जाने के लिए बस का इंतजाम करने के लिए तैयार हूं। हर जिले के भ्रमण में मेरे दो लाख रुपये खर्च हुए, जिसकी व्यवस्था के लिए मैंने अपना कीमती कंगन बेच दिया था। वह कंगन मुझे जन्मदिन पर उपहार में मिला था। इस लंबी यात्रा के बाद जब मैं घर लौटी, तो हर किसी ने धूप से झुलस चुकी मेरी त्वचा पर टिप्पणी की।
मगर मेरे लिए वे टिप्पणियां गर्व का विषय थीं। मेरा काम अभी अधूरा है। मैं अपनी पूरी यात्रा के दस्तावेज प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाऊंगी, ताकि इनकी समस्याओं का उचित समाधान भी निकले। मेरी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है और न ही मैं कोई एक्टिविस्ट हूं। मैं एक सामान्य युवती हूं, जो दूसरी महिलाओं की मदद के लिए हमेशा तत्पर है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।