समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हमारी संस्था पेलिएटिव केयर सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर काम करती है। कुछ सामुदायिक केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां निःशुल्क सलाह के साथ लोगों का इलाज किया जाता है। कुछ स्थानीय सहयोगियों की मदद से रोगियों के घर पर जाकर उन्हें नियमित मनोवैज्ञानिक थेरेपी दी जाती है। मरीजों के परिवार वालों से बात की जाती है, और साथ ही छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह भी बनाने की कोशिश की जाती है।
इन स्वयंसेवकों में गृहणियां, दुकानदार, रिक्शा चालक, चाय विक्रेता और किसानी करने वाले जैसे लोग शामिल होते हैं। हम टेली-सायकायट्री का भी इस्तेमाल करते हैं, जिसमें डॉक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मरीज का प्राथमिक इलाज करते हैं। दस साल पहले जब मैंने अपनी संस्था शुरू की थी, तो हमारी सबसे बड़ी चिंता पैसों को लेकर थी। हमारा काम अपने आप में नए तरीके का था, सो मान्यता के अभाव में हमे फंडिंग करने वाले बहुत कम लोग आगे आए।
लेकिन जैसे-जैसे हम अपने अनोखे अंदाज में गरीब मरीजों का सफल इलाज करते गए, स्थानीय लोगों ने हमारी संस्था में भरोसा जताना शुरू कर दिया। मानसिक रोगियों के लिए समाज में रह पाना बहुत मुश्किल होता है, इसलिए हम सिर्फ उनका इलाज ही नहीं करते, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए भी प्रयास करते हैं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।