प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार की बाधा पार करने के बाद मेरी पृष्ठभूमि देखते हुए इलाके के विधायक ने डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए लगने वाली फीस जमा कर दी। मेरे लिए यह बड़ी राहत की बात थी। इस बीच मैं एक एनजीओ के संपर्क में आया, जिसने डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए मुझे जरूरी उपकरण मुहैया कराए। डॉक्टर बनने के बाद मैंने खूब मेहनत की और बहुत जल्द अपना खुद का क्लीनिक शुरू कर दिया। लेकिन मेरा मकसद क्लीनिक खोलना नहीं, बल्कि दुनिया का वह कर्ज उतारना था, जिसकी बदौलत मैं कुछ हासिल कर सका। इसी उद्देश्य के साथ मैंने एक चैरिटेबल डेंटिस्ट ऑरगेनाइजेशन की शुरुआत की। यह संस्था आदिवासियों और वंचितों को मुफ्त चिकित्सीय सुविधाएं प्रदान करती है। धीरे-धीरे इस संस्था से सभी प्रकार के डॉक्टर जुड़ते गए।
मसलन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हृदय विशेषज्ञ जैसे डॉक्टर मिलकर लोगों की सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा मैंने हमेशा गरीब बच्चों की शिक्षा पर जोर दिया है, ताकि वे आगे चलकर अपनी और अपने परिवार की दरिद्रता दूर कर सकें। इसी कड़ी में मैंने अब तक हजारों जरूरतमंद बच्चों को जूते व अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराई हैं। मैंने यह भी महसूस किया है कि गरीबों की बस्ती से स्कूल दूर होना भी एक बड़ी समस्या है।
स्कूल जाने के लिए बचपन में मैं भी दूसरों के रहमो-करम से बस के किराये का इंतजाम कर पाता था। चूंकि इन सारी बातों को मैं बहुत अच्छे से समझता हूं, इसलिए इस समस्या के
समाधान के लिए मैंने उन तमाम छात्र-छात्राओं को साइकिल खरीदकर दी है, जो सिर्फ स्कूल दूर होने की वजह से किताबों से दूर थे।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।