मुझे अब किसी को पैसे नहीं देने थे, लेकिन फिर भी मैंने अतिरिक्त समय पर काम करना नहीं छोड़ा। जल्द ही मेरी मेहनत का नतीजा दिखने लगा और सब कुछ पटरी पर आ गया। परिस्थितयां चाहे जैसी भी रही हों, मैं कभी भी अपनी कमाई का दसवां हिस्सा सेवा के लिए अलग रखना नहीं भूला। फिर चाहे दिनभर में महज सौ रुपये ही क्यों न कमाए हों।
इसी बीच मेरे दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न मैं अपना दसवंद लंगर खिलाने में खर्च करूं। लेकिन मेरे जैसे टैक्सी ड्राइवर के पास लंगर का इंतजाम करने के लिए जरूरी वक्त निकालना मुश्किल था। टैक्सी में सवारियों को खिलाने-पिलाने की व्यवस्था की शुरुआत यहीं से हुई। मैं अपनी सवारियों का सत्कार बिल्कुल वैसे ही करता हूं, जैसे घर में किसी मेहमान की आवभगत की जाती है। गाड़ी में बैठते ही मैं उन्हें पानी की पेशकश करता हूं, उसके बाद वे चाहें, तो चाय या दूसरी खाने-पीने की चीजें भी ले सकते हैं। अधिकांश यात्री मेरे इस व्यवहार पर हैरत जताते हैं। लेकिन पूरी बात समझने पर वे मेरी प्रशंसा करते हैं। कुछ लोग तो मेरे साथ सेल्फी भी खींचते हैं।
उनकी प्रशंसाओं से मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। मैं यही मानता हूं कि इंसान की जिंदगी किसी दूसरे के काम न आए, तो उसका कोई मतलब नहीं है। मैं एक यूट्यूब चैनल भी चलाता हूं, जिस पर विभिन्न तरह के प्रेरणादायक वीडियो पोस्ट करता हूं। चूंकि मैं इंजीनियरिंग का काम भी कर चुका हूं, इसलिए मैंने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से संबंधित कुछ वीडियो साझा किए हैं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।