इस बात का एहसास मुझे उन बच्चों के साथ काम करने पर हुआ। उनकी सादी दुनिया में संगीत के रंगों का स्पष्ट अभाव देखा जा सकता था। मेरे दिमाग में इस स्थिति को बदलने का विचार आया। मैं कई लोगों को जानती थी, जो संगीत से जुड़े थे। मैंने उनकी मदद से वंचित बच्चों के लिए एक संगीत कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में संगीत के प्रति बच्चों का उत्साह देखने लायक था। उनके उत्साह ने ही मेरे विचार को संकल्प में बदल दिया। मुझे संगीत के माध्यम से बच्चों को सिखाने-पढ़ाने में आनंद आने लगा। वास्तव में कला और संगीत इंसानों की जिंदगी किस तरह सकारात्मक रूप से निर्देशित करते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण मेरे सामने था।
अपने काम को और बेहतर तरीके से काम करने के लिए 2008 में मैंने म्यूजिक बस्ती नाम से एक संस्था गठित की। तब से लेकर आज तक मैं झुग्गियों में रहने वाले गरीब बच्चों को किताबी ज्ञान से इतर अन्य प्रामाणिक गतिविधियों से सिखाने की कोशिश करती हूं। इन गतिविधियों में संगीत सबसे प्रमुख है। शुरुआत में मेरे काम करने का कोई संरचनात्मक ढांचा नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, मेरी टीम भी बढ़ती गई और काम करने का तरीका भी व्यवस्थित होता गया।
मौजूदा समय में मैं स्कूलों के साथ मिलकर एक वर्षीय कार्यक्रम चलाती हूं, जिनमें पेशेवर तरीके से गरीब बच्चों को संगीत से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जाता है। ये बच्चे समय-समय पर कई म्यूजिक कंसर्ट में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर पाते हैं। इसके अलावा जरूरी रूप से सालाना हम एक बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं, जिसमें पूरी मेहनत से बच्चे खुद ही गाना कंपोज करते हैं, गाते-बजाते हैं।
मेरा उद्देश्य यही है कि मैं किसी भी स्तर पर बच्चों के विकास में रचनात्मकता की बढोतरी कर सकूं। और जिस काम में मुझे आनंद आता है, मैंने वही तरीका चुना। ऐसा करने में कई चुनौतियां आती हैं, मगर यकीन करिए, अगर आप दृढ़ संकल्पित हैं, तो वे आपके सामने नहीं टिकेंगीं।