दो साल पहले शहर के कामपल्ली स्क्वायर को विकसित और चौड़ा करने के इरादे से ब्रह्मपुर विकास प्राधिकरण (बीडीए) द्वारा राज्य के विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता बृंदाबन नायक की प्रतिमा चौराहे से हटाकर एक कोने में स्थापित कर दी गई। जिस नई जगह पर प्रतिमा लगाई गई थी, उसे लोहे के पाइपों से घेर दिया गया। लेकिन मूर्ति स्थल का नया स्वरूप मुझे कुछ जंच नहीं रहा था। मैंने उस जमीन के टुकड़े को मिनी पार्क के रूप में विकसित करने का फैसला किया।
इसके लिए मैंने बीडीए की अनुमति भी ली। पार्क तैयार करने के लिए मैंने बंगलूरू से मखमली घास और सजावटी पौधे मंगवाए। पार्क के अंदर एक तोप के साथ-साथ मैंने एक सैनिक की मूर्ति और सैनिक के बूट की प्रतिमा भी स्थापित की। वैसे तो कामपल्ली स्क्वायर में कई हाई मास्ट लाइटें लगी हैं, फिर भी मैंने विभिन्न सजावटी लाइटों के अलावा पार्क में सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले पानी के छोटे फव्वारे भी लगावाए। फव्वारे तो लग गए, लेकिन हमारे इलाके में पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी। इसके लिए मुझे हर दिन पानी खरीदना पड़ता है।
मैं अब बूढ़ा हो रहा हूं। कई मर्तबा मेरा शरीर मेरी इच्छाओं से तालमेल नहीं बिठा पाता, मगर बढ़ती उम्र मुझे अभी थाम नहीं सकी है। मैं अपने दो दोस्तों, बालकृष्ण और शिवलिंगम के साथ मिलकर शहर को स्वच्छ रखने का प्रयास करता रहता हूं। मैं चाहता हूं कि नगर निकाय और बीडीए अपनी जिम्मेदारी समझे और मेरे द्वारा विकसित किए गए पार्कों की देखरेख की जिम्मेदारी उठाए, जो कि उनका कर्तव्य भी है। मैं यह भी मानता हूं कि शहर को साफ और सुंदर रखना केवल म्युनिसिपालिटी या विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए हर एक नागरिक को जागरूक होकर अपना योगदान देना होगा।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।