मेरी पत्नी भावना एक आयुर्वेदिक अस्पताल में काम करती है। डिजिटल मंच की सभी तरह की जरूरतों के लिए मैंने अपनी जेब से सात लाख रुपये खर्च किए हैं। लेकिन ये रुपये किसी काम के नहीं होते, यदि इस काम में मुझे अपनी पत्नी का भावनात्मक सहारा न मिलता।
डिजिटल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर मैंने अन्य शिक्षकों के लिए बीस से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन किया है। उनके लिए मेरी कार्यशाला बिल्कुल निःशुल्क होती है। इस तरह मैंने अब तक करीब तीन हजार लोगों को प्रशिक्षण दिया है। यहां तक कि राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा भी मेरे एक कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं। यह सच में मेरे लिए एक सम्मान की बात है। पिछले वर्ष मुझे शिक्षकों के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया।
मैं और मेरी पत्नी मिलकर एक विशेष पुस्तक पर्व का भी आयोजन करते हैं, जहां से कोई भी जरूरतमंद बच्चा निःशुल्क किताबें ले सकता है। और उसे उस किताब को लौटाने की भी जरूरत नहीं होती। मैं तकनीक के जरिए गरीब बच्चों का भविष्य संवारने में जुटा हूं। मैं बस यही चाहता हूं कि जो बच्चे ट्यूशन पढ़ने में असमर्थ हैं, वे घर बैठे मेरी क्लास के जरिये पढ़ाई करें। आज की तारीख में मेरी वेबसाइट पर लाखों विजिटर हैं, जबकि मेरे यूट्यूब चैनल के भी हजारों फॉलोअर हैं। स्मार्टफोन के युग में कोई भी मुझसे जुड़कर बहुत आसानी से गणित की उलझनें सुलझा सकता है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।