कहा जाता है कि भगवान के दरबार में सब बराबर होते हैं लेकिन भारत ही ऐसा देश हैं जहां हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के पास से दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सेवा के नाम पर वीआईपी और वीवीआईपी कैटेगरी में दर्शन कराए जाते हैं। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में सिर्फ महाकाल मंदिर में ही भस्मारती होती है। जहां देश-विदेश से श्रद्धालु भस्मारती दर्शन की चाह लिए मध्य प्रदेश के उज्जैन आते हैं। लेकिन इन दिनों भस्मारती अनुमति को लेकर जमकर दलाली का खेल खेला जा रहा है।
मंदिर प्रशासन के आंकड़े खुद ही स्थिति बता रहे हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार हर दिन नंदी हॉल के लिए लगभग 100 लोगों की अनुमति भी जारी नहीं की जा रही है। जबकि हर दिन 250 से अधिक श्रद्धालु नंदी हॉल में बैठकर भस्मारती के दर्शन कर रहे हैं। ये श्रद्धालु कहां से आ रहे हैं, इसका जवाब मंदिर प्रशासन के पास भी नहीं है। तय संख्या से अधिक भक्तों के आने पर कई लोगों को अनुमति नहीं मिल पाती। ऐसे में दलाल इसका फायदा उठाते हैं और मनचाहे दाम पर अनुमति बेचते हैं।
भस्मारती अनुमति की व्यवस्था पर पहले भी कई बार सवाल उठ गए हैं। भस्मारती अनुमति की व्यवस्था पर पड़ताल की तो पता चला कि अभी भी वीआईपी के नाम पर अनुमति जारी कराने का रैकेट सक्रिय है। सूत्र बताते हैं कि पंडित-पुरोहित के यजमान सहित कर्मचारियों से जुड़े लोगों को यहां बैठा दिया जाता है। इसके एवज में मोटी रकम वसूल की जाती है। बताया जा रहा है कि पंडे-पुजारी रुपए का लेन-देन कर यजमान के नाम पर मंदिर समिति से किसी की भी अनुमति जारी करा लेते हैं।