घर आकर इतनी खुश हुई मानों चारों तरफ फिल्मी अंदाज में तितलियां उड़ रही हों। उनके फोन का इंतजार करने लगी। दो दिन बाद इनकी बहन का फोन आया तो मुझे इनका नंबर दिया। पर मैं भारतीय नारी इनके फोन का इंतजार करने लगी।
दशहरे पर इनका फोन आया तो बातें शुरू हो गईं। सब कुछ अच्छा चल रहा था। अचानक हमारे प्यार को किसी की नजर लग गई। मेरे बारे में किसी ने इनकी बहन से बहुत कुछ बुरा कहा। इनके फोन आने बंद हो गए। पर मैं तो इन्हें खोना नहीं चाहती थी।
करवाचौथ का व्रत करके भगवान से प्रार्थना की और निर्णय लिया कि मुझे इन्हें ही अपना जीवनसाथी बनाना है। खैर कुछ दिनों बाद सब कुछ ठीक जानकर इन्होंने मुझे फोन किया। किंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था।
शादी का वक्त नजदीक आ रहा था। किसी ने इनको फोन करके धमकी दी, और मुझसे शादी न करने के लिए कहा। मेरे तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई। मैं सोचती रह गई आखिर कौन है। जो यह नहीं चाहता कि हम शादी के बंधन में बंधे।
दिन बीतते गए और शादी के चार दिन पहले किसी का दोबारा फोन आया। फिर इन्हें ऐसी ही धमकी दी अगर कोई और लड़का होता तो शायद ये सारी बातें सच मानकर शादी न करता। मैं भी थक चुकी थी, इनको अपना सब कुछ मान चुकी थी। लेकिन मेरे चरित्र पर इतने दाग लगे कि शादी करने का मन ही नहीं रहा।
तब इन्होंने मेरा साथ दिया और मुझसे शादी करने के लिए डटे रहे। मेरे पास भी कोई रास्ता नहीं था, समाज के आगे और इनकी इच्छाशक्ति के आगे झुकना पड़ा। शादी के लिए तैयार हो गई। और वो दिन भी आ गया, सुबह से ही मन में डर था अगर धमकी वाली बात सच हो गयी तो मेरी वजह से कितनी जि़ंदगियां बेकार हो जाएंगी। लेकिन भगवान सच का साथ देते हैं।
सब कुछ सही सलामती से खत्म हो गया। शादी में आखिरी फेरा लेते वक्त दिल ने इतना ही कहा जो हमारी आत्मा को संतुष्ट करे वही सच है। सच को प्रमाण की जरूरत नहीं होती, अंतरात्मा को संतुष्ट करता है। मेरा भी सपना पूरा हो गया और पहली नजर का प्यार मेरा हो गया। आज हमारी शादी को सात साल हो चुके हैं। आज भी हम एक-दूसरे पर आंखें बंद करके भरोसा करते हैं और करते रहेंगे।