संजय राउत ने भाजपा के नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील को अपने अंदाज में निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने को लेकर पाटील राष्ट्रपति की तरह सवाल उठा रहे हैं। क्या यह सिफारिश संविधान सम्मत नहीं है।
गौरतलब है कि चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि राज्यपाल को उद्धव को एमएलसी मनोनीत करने के पीछे तमाम कानूनी बाधाएं हैं। उद्धव को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत एमएलसी मनोनीत नहीं किया जा सकता, क्योंकि मनोनीत किए जाने वाले एमएलसी के रिक्त कार्यकाल में छह महीने से कम का समय बचा है।
संजय राउत ने कहा कि चंद्रकांत पाटील क्या कह रहे हैं, उसपर मुझे नहीं जाना है। उद्धव ठाकरे प्रोफेशनल फोटोग्राफर रहे हैं। सामना के प्रधान संपादक, सोशल वर्कर रहे हैं। इसी बिना पर कैबिनेट ने राज्यपाल से उन्हें एमएलसी मनोनीत करने की सिफारिश की है। राउत ने कहा कि चुनाव आयोग ने कोविड-19 संक्रमण के फैलाव की आशंका को देखते हुए चुनाव टाला है।
इसमें उद्धव का दोष नहीं है। इसके लिए शिवसेना जिम्मेदार नहीं है। चुनाव आयोग, चुनाव टालेगा तो उद्धव कैसे सदस्य बन जाएंगे? इसलिए यह आपात स्थिति है। इसे राज्यपाल को भी समझना पड़ेगा।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना किसी और विकल्प पर नहीं सोच रही है। न ही उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल समेत इस्तीफा देकर दोबारा शपथ लेंगे। उन्होंने कहा कि मुझपर यकीन कीजिए।
अभी 27 मई तक उद्धव ठाकरे बिना विधानसभा का सदस्य बने मुख्यमंत्री रह सकते हैं। तबतक राज्यपाल अपना निर्णय लेकर उन्हें एमएलसी मनोनीत कर देंगे।
महाराष्ट्र में राज्यपाल द्वारा मनोनीत तीन सदस्य राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। 2 फरवरी 1983 को मुख्यमंत्री बने वसंतदादा पाटिल, 3 जून 1985 को मुख्यमंत्री बने शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर, 12 मार्च 1986 को मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने वाले शंकरराव चव्हाण भी विधान परिषद सदस्य हो चुके हैं।
इसके अलावा 1993 में मुंबई बम धमाके के बाद सुधाकर राव नाईक की जगह मुख्यमंत्री बने शरद पवार भी विधान परिषद सदस्य बने थे।
शिवसेना उत्तर प्रदेश के साल 1961 के फार्मूले का भी जोरशोर से प्रचार कर रही है। शिवसेना के नेता आश्वस्त हैं कि इस आधार पर उद्धव ठाकरे को अवश्य ही राज्यपाल एमएलसी मनोनीत करेंगे।
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में 1961 में चंद्रभान गुप्ता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद गुप्ता को राज्यपाल ने विधान परिषद के लिए नामित किया था।