महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस महीने एक साथ तीन चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। एक तरफ, कोरोना संक्रमण से निपटने की जद्दोजहाद तो दूसरी ओर मानसूनी बारिश से मुंबई के फिर ठप होने का खतरा और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप है।
जून महीने में विधान परिषद के 12 सदस्यों के पद रिक्त हुए हैं, जिन्हें राज्यपाल की तरफ से मनोनीत किया जाना है। इसको लेकर सत्ताधारी दल शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी में एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है।
कांग्रेस में अब तक 146 तो एनसीपी में 50 दावेदारों ने आवेदन किये हैं। अब तक राज्य सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल किसी को भी विप सदस्य मनोनीत कर देते रहे हैं जबकि नियमतः साहित्य, कला, विज्ञान, समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को ही मनोनीत करने का प्रावधान हैं।
विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि राज्यसभा की तरह विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने में भी नियम का पालन जरूरी है। इससे सत्ताधारी दल के नेता भी आशंकित हैं। इसलिए अनेक नेताओं ने अपना बायोडाटा ऐसा तैयार किया है जो नियम के अनुरूप फिट बैठ सके।
राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश के बावजूद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत नहीं किया। इससे पहले एनसीपी के दो नाम राजभवन भेजे गए थे जिसे मंजूरी नहीं दी।
अब सवाल उठता है कि क्या वे अब ठाकरे सरकार की सिफारिश मानेंगे। अंदरखाने चर्चा है कि कोश्यारी पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी की राह चल सकते हैं। दरअसल, 2017 में किरण बेदी ने बिना राज्य सरकार की सिफारिश के विधानसभा में तीन सदस्यों को मनोनीत किया था।
मामला मद्रास हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट गया जहां दिसंबर 2018 में बेदी के फैसले को बरकरार रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल को सदस्य मनोनीत करने का अधिकार है। इससे भाजपा को बल मिला है क्योंकि राज्यपाल महाराष्ट्र की नहीं दिल्ली की सुनने वाले हैं।