कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के चलते देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। वहीं, 21 दिन के लॉकडाउन में आम लोगों और प्रवासी मजदूरों की कठिनाइयों का अंत नहीं दिख रहा है। राज्य सरकार यूं तो तमाम दावे कर रही है, लेकिन संकट की इस घड़ी में सरकार का काम जमीन पर कम ही दिखाई दे रहा है।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले मजदूरों को पहले उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। जब बीते रविवार को केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों के मजदूरों के पलायन पर सख्त रूख अपनाया तो राज्य सरकार ने राहत केंद्र खोलने का एलान किया।
लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आज भी लोग अनाज के लिए तरस रहे हैं। खुद उद्धव ठाकरे ने लोगों से अपील की थी कि प्रवासी मजदूर जहां हैं वहीं रहें। सरकार उनका पूरा ध्यान रखेगी।
नालासोपारा के सुधीर तिवारी और कलवा के अशोक चौबे बताते हैं कि स्थानीय नेताओं ने काफी मदद की है। वे मजदूर वर्ग के लोगों को खिचड़ी दे रहे हैं, जिससे लोगों का गुजारा हो रहा है। लेकिन खिचड़ी खाकर कितने दिनों तक गुजारा हो सकेगा।
महाराष्ट्र में 9 मार्च 2020 को दुबई से लौटे एक दंपति में कोरोना वायरस पॉजिटिव होने का पहला मामला सामने आया था। वहीं, कोरोना वायरस की चपेट में आने से पहली मौत 17 मार्च को हुई थी। उसके बाद से राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या दिनोदिन बढ़ती गई और यह सिलिसला लगातार जारी है।
अब तक महाराष्ट्र में 26 की मौत हो गई है जबकि कोरोना वायरस के पॉजिटिव मरीजों की संख्या 500 तक पहुंच चुकी है। दक्षिण मुंबई के वरली कोलीवाडा और मध्य मुंबई के धारावी झुग्गी बस्ती में संक्रमण बढ़ने से कोरोना विस्फोट की आशंका है।
ऐसे में संक्रमण के तीसरे चरण की बढ़ने की आशंका बढ़ चली है। बीएमसी के स्वास्थ्य अधिकारी मानते हैं कि सघन आबादी वाले इलाके में तेजी से संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाल के दिनों मे कोरोना संक्रमित रोगियों का आंकड़ा इसलिए अधिक बढ़ा है क्योंकि मुंबई में प्रतिदिन 1000 लोगों की जांच हो रही है। इससे मरीज जल्द सामने आ रहे हैं और इसका उपचार भी जल्द हो सकेगा। हमें तीसरे चरण का खतरा फिलहाल नहीं दिखाई देता।
-बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त प्रवीण परदेसी
महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता श्वेत शालिनी ने कहा, राज्य सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए अभी तक कुछ भी नहीं किया। यह दुखद है कि महाराष्ट्र में रह रहे यूपी और बिहार के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।
वे कोरोना या भुखमरी में से कोरोना चुनने को बाध्य हैं। श्वेता कहती हैं कि राज्य सरकार की तिजोरी में असंगठित मजदूरों के लिए कुछ नहीं किया, जबकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों के खाते में पैसे जमा करवा दिए हैं।
अभी तक राज्य सरकार की तरफ से कोरोना संकट में महज 45 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य की सरकार इस महामारी से निपटने के प्रति कितनी गंभीर है।
शिवसेना प्रवक्ता पियंका चतुर्वेदी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार सबका ध्यान दे रही हैं। सभी के लिए भोजन और निवास की व्यवस्था के साथ ही दिन-रात उनकी सेवा की जा रही है। हर शिवसैनिक मदद कर रहा है। हमने भी अपनी तरफ से और एनजीओ की ओर से लोगों को सहयोग किया है।
करीब 181 जगहों पर फूड डिस्ट्रीब्यूशन और 428 जगहों पर शिवभोजन के अलावा रहने के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि किसी की भी नौकरी नहीं जानी चाहिए। जैसे ही लॉकडाउन खत्म होगा, वैसे ही उन्हें उनका वेतन मिलना चाहिए। जहां लगेगा कि कुछ कमीं रह गई है उसे भी पूरा किया जाएगा।
होटल व्यवसायियों के संगठन फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कोरोना से निपटने के लिए सरकार को अपने होटलों के 45 हजार कमरे सौपने का प्रस्ताव दिया है।
फेडरेशन चाहता हैं कि सरकार इनका इस्तेमाल कोरोना वायरस से संक्रमितों के क्वरंटाईन के लिए करे। वहीं, कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे डाक्टरों के आराम के लिए भी होटलों का दरवाजा खोला गया है।
फेडरेशन के अध्यक्ष गुरबक्श सिंह कोहली ने शनिवार को कहा कि हमने अपने सदस्य होटल व्यवसायियों से अपील की है कि संकट की इस घड़ी में सरकार का पूरी तरह से साथ दें। हमारे सदस्य देशभर में अपने होटलों के कमरे सरकार को देने की तैयारी दिखाई है।
इसके अलावा होटल मालिक खाने का पैकेट भी देना चाहते हैं, जिससे जरुरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जा सके। होटल व रेस्टोरेंट से जुड़े लोग सरकार व स्थानीय निकाय के साथ मिलकर हर रोज 2 लाख लोगों का भोजन तैयार कर सकते हैं।