भारत सरकार ने 2030 तक भारत को तपेदिक मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुफ्त इलाज और दवाओं के बावजूद हर साल देशभर में टीबी के हजारों नए मरीज मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश में टीबी मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते दो सालों में कोरोना संक्रमण के चलते टीबी के लक्षण वाले लोगों की पर्याप्त जांच नहीं हो सकी, लिहाजा अब कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में टीबी के मरीज मिल रहे हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश में छतरपुर जैसे छोटे जिले में टीबी के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। वहीं राजधानी भोपाल टीबी मरीजों के मामले में दूसरे पायदान पर है। भोपाल में बीते तीन सालों से टीबी मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालांकि भोपाल में टीबी संक्रमितों की संख्या ज्यादा होने का कारण यहां अन्य जिलों के लोगों का जांच कराना भी है। टीबी के नए मरीजों की पहचान के लिए भोपाल में अन्य जिलों की तुलना में जांचें ज्यादा की जाती हैं।
राजधानी में जनवरी 2022 से अब तक 6 हजार नए मरीज मिले
जनवरी 2022 से लेकर अब तक राजधानी भोपाल में छह हजार नए मरीज मिले हैं, जबकि 2021 में जिले में करीब 10,736 मरीज मिले थे। वहीं, 2020 में 8245 टीबी मरीज मिले थे। प्रदेश के कई जिलों में टीबी की जांच न होने के कारण नए मरीजों की पहचान भी नहीं हो पा रही है। प्रदेश में टीबी संक्रमितों की संख्या में उछाल आने के पीछे एक बड़ा कारण कोरोनाकाल में मरीजों की जांच न होना भी है। महामारी के दो साल में स्वास्थ्य अमला कोरोना संबंधी कामों में व्यस्त था, साथ ही लोग भी जांच कराने नहीं पहुंचे। नतीजन साल 2020 में कम टीबी मरीज मिले लेकिन अब महामारी के थमने के बाद बड़ी संख्या में टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं।
इंदौर में बीच में इलाज छोड़ रहे टीबी मरीज
इंदौर की बात करें तो यहां हर साल टीबी के 10-12 हजार नए मरीज मिलते हैं। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि हर साल मिलने वाले नए मरीजों में से करीब 250 लोग टीबी का इलाज पूरा न करा के बीच में ही छोड़ देते हैं। एक बार बीच में इलाज कराना छोड़ देने के बाद ऐसे टीबी मरीजों पर सामान्य दवाओं का असर नहीं होता। जिले में करीब 300 ऐसे टीबी मरीज हैं जो नि:शुल्क इलाज और मुफ्त दवाएं मिलने के बाद भी इलाज कराना बंद कर चुके हैं। टीबी मरीजों की सेहत में सुधार के लिए उन्हें पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। लिहाजा सरकार टीबी संक्रमितों को हर माह 500 रुपये पौष्टिक आहार के लिए सीधे लिंक खातों में प्रदान करती है। इतनी सुविधाएं देने के बाद भी टीबी मरीज इलाज पूरा नहीं करा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दवाइयों से बीमारी पूरी तरह ठीक होने के बावजूद ज्यादातर लोग तपेदिक की जांच करवाने से परहेज करते हैं। फेंफड़ों की टीबी के अलावा अन्य किसी भी तरह की टीबी संक्रमित नहीं होती।