आज विश्व पर्यावरण दिवस है। पर्यावरण के लिहाज से इंदौर की बात करें तो स्वच्छता के मामले में इंदौर लगातार नंबर बना हुआ है। देश का सबसे स्वच्छ शहर अब पर्यावरण सुधार को लेकर काम कर रहा है। शहर की आबोहवा सुधारने पर फोकस किया जा रहा है। हालांकि हवा के लिहाज से देखें तो इंदौर की हवा में बीते कुछ सालों में लगातार सुधार हुआ है और करीब 40 प्रतिशत तक इंदौर की आबोहवा शुद्ध हुई है।
भूजल को लेकर चिंता की बात है, क्योंकि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। भूजल स्तर गिरकर 3.20 मीटर तक पहुंच गया है। चिंता यह है कि 600 से 650 फीट गहराई तक बोरिंग करने पर पानी मिल रहा है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भूजल स्तर में यह गिरावट पिछले करीब पांच-सात सालों में हुई है। 2015 में भूजल स्तर 13.68 मीटर था, जो गिरकर 2019 में 3.59 मीटर पहुंच गया। अभी 3.20 मीटर के आसपास है। निरंजनपुर, लसूड़िया, गांधी नगर और मूसाखेड़ी क्षेत्र में 650 फीट तक बोरिंग करना पड़ रहे हैं।
बढ़ गया शहर का औसत तापमान
पौधारोपण को लेकर हर बार बात होती है। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं मगर सभी दावों के बावजूद हरियाली में कमी आ रही है। कहा जा रहा है कि शहर में 20 से 30 प्रतिशत ग्रीन कवर की जरुरत है। सड़क चौड़ीकरण सहित शहर के अन्य निर्माण कार्यों के चलते यह कमी आई है क्योंकि जितनी हरियाली उजाड़ी गई उसकी तुलना में पौधे नहीं लगे और ग्रीन कवर घटता गया। करीब 25 सालों में शहर का औसत तापमान भी बढ़ चुका है। पहले जहां 35 डिग्री के आसपास औसत तापमान रहता था वहीं अब 40 से 45 डिग्री तक पहुंच चुका है।
सुधरी है हवा की गुणवत्ता
इंदौर में हवा की गुणवत्ता सुधरी है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें तो 2015-16 में इंदौर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 125 था, जो 2021-22 में करीब 40 फीसदी सुधरकर 76 रह गया है। स्वच्छता को लेकर किए गए कामों के अलावा उद्योगों के प्रदूषण, तंदूर चलाने पर रोक, सिग्नल पर इंजन बंद जैसी मुहिम और अन्य प्रयासों से आबोहवा बेहतर हुई है। कोरोना के चलते जब 2020 में लॉकडाउन लगा था तब एयर क्वालिटी इंडेक्स 70 तक पहुंच चुका था। ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण बोर्ड के मुताबिक रेलवे स्टेशन, सरवटे, गंगवाल बस स्टैंड, विजय नगर चौराहा, राजबाड़ा, महू नाका, पलासिया चौराहा, बंगाली चौराहा, भंवरकुआं चौराहे, एमजी रोड प्रदूषण के हॉट स्पॉट हैं।