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आपने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया... मुझे भी इनके साथ ले चलो... और भय्यूजी महाराज चले गए

Thu, 14 Jun 2018 06:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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भय्यूजी महाराज के अंतिम संस्कार में डॉ. आयुषी और बेटी कुहू - फोटो : Special Arrangement
भय्यूजी महाराज का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गया। लेकिन उनके अंतिम संस्कार से पहले तक के घटनाक्रम में शामिल लोगों की आंखों ने जिस मंजर को देखा उसने सबकी आंखें नम कर दीं। भय्यूजी महाराज के अंतिम दर्शन की तस्वीरें उस भावुक मंजर को बयां करती हैं। भय्यूजी महाराज का पार्थिव शरीर एक कूलर में रखा था और चारों ओर से कांच में बंद था। पार्थिव शरीर के सिरहाने बैठी बेटी बेसुध थी और उसके चित्कार को सुनकर लोगों का कलेजा बैठा जा रहा था। वह बस बार-बार कह रही थी, "आपने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया।" वह अपने पिता को बस एक बार और छू लेना चाहती थी लेकिन बीच में थी कांच की एक मोटी परत। 
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भय्यूजी महाराज के अंतिम संस्कार में बेटी कुहू - फोटो : Special Arrangement
बस वह एक ही बात कह रही थी एक बार मुझे बाबा को छू लेने दो... उन्हें एक बार गले तो लगा लेने दो। बाबा मैं तो अभी बच्ची हूं आपने अपनी बच्ची को कैसे अकेला छोड़ दिया। अब मैं किसके सहारे जियूंगी। और उसकी आंखों से आंसू झर-झर बह रहे थे। 
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भय्यूजी महाराज के अंतिम संस्कार में डॉ. आयुषी - फोटो : Special Arrangement
पार्थिव शरीर के साथ जाना चाहती थी पत्नी 

भय्यूजी महाराज के पार्थिव शरीर को फूलों से सजी गाड़ी में ले जाया गया। सुबह से पार्थिव शरीर के पास बैठी उनकी पत्नी ये देखते ही चित्कार कर उठी और बोली, "उन्हें अकेले कहां ले जा रहे हो, मुझे भी साथ ले चलो, मैं उनके बिना जीकर क्या करूंगी, उनके बिना कैसे रहूंगी जिनके बिना मैं एक घंटे भी नहीं रह पाती थी।" इसके बाद बेसुध डॉ. आयुषी जमीन पर गिर पड़ीं। इससे पहले जब भय्यूजी महाराज की तीन महीने की मासूम बेटी को पिता के अंतिम दर्शन के लिए लाया गया तब भी वहां मौजूद सबकी आंखें नम हो गई थीं। 

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भय्यूजी महाराज का अंतिम संस्कार
मां-बेटी के बीच पसरा तनाव साफ दिखा

जिस पारिवारिक कलह को भय्यूजी महाराज की खुदकुशी की वजह बताया जा रहा है वह उनकी मौत के बाद भी दिखाई दी। बुधवार सुबह बॉम्बे अस्पताल से सेवादार भय्यू महाराज के पार्थिव शरीर को उनके निवास शिवनेरी लेकर पहंचे। पार्थिव शरीर को बापट चौराहे स्थित उनके सूर्योदय आश्रम लाया गया। जानकारी के अनुसार घर से आश्रम जाने के लिए डॉ. आयुषी और कुहू एक ही गाड़ी में सवार थीं लेकिन इस दौरान उन्होंने एक दूसरे की तरफ देखा तक नहीं। 
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भय्यूजी महाराज के अंतिम संस्कार में बेटी कुहू
एक ओर जहां पत्नी को उनके परिजन सांत्वना दे रहे थे वहीं भय्यू महाराज की मां और बेटी को भय्यू महाराज के करीबी और उनके सेवादार संभाल रहे थे। भय्यूजी महाराज के पार्थिव शरीर के एक तरफ पत्नी डॉ. आयुषी और दूसरी तरफ बेटी कुहू बैठी विलाप करती रहीं लेकिन इस बेहद पीड़ादायक समय में भी दोनों ने एक दूसरे से बात कर उन्हें तसल्ली नहीं दी। पत्नी कुर्सी पर बैठी भय्यूजी के पार्थिव शरीर को एकटक निहारती रही। वहीं बेटी जमीन पर बैठ पिता के चेहरे को सहलाती रही मानो कह रही हो पापा उठ जाओ। 
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भय्यूजी महाराज
राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने वाले शख्स को अंतिम विदाई देने नहीं आया कोई भी मंत्री

अंतिम संस्कार से पहले भय्यूजी के पार्थिव शरीर को सूर्या आश्रम पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। भय्यूजी महाराज के अंतिम संस्कार में मध्य प्रदेश का कोई बड़ा भाजपा या कांग्रेस का नेता शामिल नहीं हुआ। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी भय्यूजी के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे।  जिस कारण भय्यूजी महाराज को राजकीय सम्मान नहीं दिया गया। जबकि चौहान उनके काफी करीब रहे। भय्यूजी महाराज की पहली पत्नी के निधन पर मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ उनके शोक सभा में शामिल हुए थे। यहीं नहीं उनके अंतिम संस्कार में प्रदेश का कोई मंत्री भी नजर नहीं आया। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान करने वाले पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था जिसमें भय्यूजी महाराज भी शामिल थे। हालांकि भय्यूजी ने राज्यमंत्री का दर्जा लेने से इंकार कर दिया था। 
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नरेंद्र मोदी का उपवास खुलवाते हुए भय्यूजी महाराज
वीआईपी आगंतुकों के लिए प्रशासन ने की थी तैयारी

भय्यूजी महाराज का मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बड़ा कद था। साथ ही वे देशभर में सुर्खियों में रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अन्ना हजारे के साथ मंच साझा किया था। भय्यूजी महाराज के भक्तों में नामी-गिरामी हस्तियां शामिल थीं। देश के कई बड़े राजनेता, उद्योगपति, फिल्मी दुनिया की हस्तियां, गायक और चर्चित हस्तियां उनके आश्रम में आ चुके हैं। इनमें पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, बॉलीवुड की मशहूर गायिका आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म अभिनेता, मिलिंद गुणाजी जैसे चर्चित नाम भी शामिल हैं। इंदौर जिला प्रशासन ने कई वीवीआईपी के पहुंचने की उम्मीद से व्यापक तैयारी की थी। 

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भय्यूजी महाराज के अंतिम संस्कार में पंकजा मुंडे
ये बड़े नाम पहुंचे अंतिम विदाई देने

भय्यूजी महाराज के अंतिम दर्शन करने के लिए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, महाराष्ट्र की ग्राम विकास मंत्री पंकजा मुंडे और कांग्रेस नेता शोभा ओझा पहुंचीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने ओएसडी को भेजा था। मध्यप्रदेश से इंदौर क्रमांक-2 से विधायक रमेश मेंदोला पूरे समय वहां मौजूद रहे। वहीं विधायक महे हार्डिया, मालिनी गौड़, पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे के अलावा कई भाजपा नेता अंतिम दर्शन करने पहुंचे। इसके अलावा पूर्व विघायक तुलसी सिलावट, कृपाशंकर शुक्ला आदि भी अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे थे। शोभा ओझा पूरे समय भय्यू महाराज की पत्नी को संभालती रहीं। 

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भय्यूजी महाराज का उत्तराधिकारी कौन होगा

भय्यूजी महाराज सूर्योदय आश्रम में अपने अनुयायियों को जीवन जीने की कला सिखाते थे। उनकी अंतिम यात्रा भी इसी आश्रम से निकाली गई। अब यह सवाल भी खड़े हुए हैं कि भय्यूजी महाराज ने जिस आश्रम को तैयार किया अब उसका क्या होगा। भय्यूजी महाराज ने अपने सुसाइड नोट में अपने सेवादार विनायक को पूरी जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन यह तभी संभव है जब आश्रम के ट्रस्टी भी विनायक को यह जिम्मेदारी सौंपे। विनायक के नाम पर ट्रस्टियों में सहमति नहीं होने पर नया उत्तराधिकारी नियुक्त होगा। अब ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि आश्रम की जिम्मेदारी बेटी कुहू को सौंपी जाएगी या डॉ. आयुषी को। क्योंकि दोनों ही आश्रम की सेवाओं में हिस्सा लेती रही हैं। 
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सेवादार विनायक कौन है

विनायक भय्यूजी महाराज का सबसे खास सेवादार था। वह करीब 20 साल पहले भय्यू महाराज के संपर्क में आया था तब से ही वह महाराज से इतना प्रभावित हुआ की उन्हीं का होकर रह गया। विनायक भय्यूजी महाराज के परिवार के सदस्य की तरह था। भय्यूजी महाराज की संपत्ति, परिवार और सभी कार्य विनायक की देखरेख में चलते थे। भय्यूजी महाराज की सुसाइड नोट में भी विनायक का जिक्र है, जिसमें उन्होंने पूरी संपत्ति उनके नाम कर दी है।  
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