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बुंदेलखंड में पानी की रखवाली कर रहे हथियारबंद गार्ड

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सूखे की मार झेलते बुंदेलखंड से किसानों की आत्महत्या की खबरें तो गाहे बगाहें आती ही रहती हैं, लेकिन ये खबर जो हम आपको दे रहे हैं उसे पढ़कर सच में आप हैरत में पढ़ जाएंगे। सोना-चांदी और कीमती चीजों की रखवाली में तो आपने हथियारबंद गार्डों को मुस्तैद देखा होगा लेकिन अगर ये ही गार्ड पानी की रखवाली में लग जाएं तो कैसा लगेगा।
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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार मध्यप्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के टीकमगढ़ में आजकल बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है। जहां एक नहर के पानी की रखवाली में तीन चार हथियारबंद गार्ड हर समय तैनात रहते हैं। टीकमगढ़ नगर पालिका परिषद को डर है कि कहीं उनके हिस्से का पानी नजदीकी यूपी के लोग चुरा न ले जाएं इसलिए गार्डों की तैनाती की गई है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में इस बार मात्र 473.6 मिमी बारिश हुई जबकि औसतन बारिश का स्तर 995 मिमी है। कम बारिश के कारण यहां लगातार सूखे के हालात बने हुए हैं और लोग पीने के पानी के लिए भी तरस रहे हैं।
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यूपी के किसानों से है पानी चुराने का डर

टीकमगढ़ नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष भाजपा की लक्ष्मी गिरी गोस्वामी ने बताया कि वो इन सुरक्षा गार्डों का भुगतान अपने खर्चे पर कर रही हैं। जिला कलेक्टर ने यूपी के ललितपुर के जिलाधिकारी से इस संबंध में बात की थी कि यूपी के किसान नदी से पानी नहीं निकाल सकें लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।

ऐसे में हमारे पास अपने पानी के स्रोत को बचाने के अलावा कोई चारा नहीं है। अगर पानी के स्रोत पर पहरा बना रहता है तो यह पानी छह महीने के लिए हमारे कस्बे की जरूरतें पूरी कर सकता है।

टीकमगढ़ की आबादी 90 हजार के करीब है जो 27 वार्ड में बंटी हुई है। इनमें से आधे से ज्यादा वार्ड में नगर पालिका की ओर से दो दिन में एक बार पानी सप्लाई किया जाता है। जबकि बाकी वार्डों को तीन दिन में एक बार ही पानी नसीब हो पाता है।
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सूखे से जूझ रहा बुंदेलखंड का इलाका

पानी की आपूर्ति कस्बे से पांच किलोमीटर दूर जैमिनी नदी पर बने बांध से होती है। जिससे पानी यूपी-एमपी बार्डर पर बने राजघाट बांध को जाता है। हथियारबंद गार्ड बांध के एक किलोमीटर लंबे क्षेत्र में देर रात तक पहरेदारी करते हैं।

पालिका परिषद की ओर से गार्डों की यह व्यवस्‍था बीते दो महीने से तब से की गई है, जब से फसलों की स‌िंचाई शु्रू हुई है। बता दें कि बुंदेलखंड में बीते तीन साल से किसानों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और निराश किसान खुदकुशी जैसे कदम उठा रहे हैं।

लेकिन सरकारों को उनकी कोई सुध ही नहीं है। वहीं ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव अरुण शर्मा ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई के लिए बजट की व्यवस्‍था की जा रही है।
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