पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले में पहली एफआईआर इंदौर के राजेंद्र नगर थाने में दर्ज कराई गई थी। उसके बाद से इस मामले की जांच पहले एसटीएफ और बाद में सीबीआई को दी गई। सीबीआई ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी करने के आरोप में 31 लोगों को आरोपी बनाया था। इस मामले में गवाही साल 2014 से शुरू होकर पांच साल तक गवाही चली। साल 2000-12 के बीच पूरे मध्य प्रदेश में करीब 55 मामले दायर किए गए।
इस मामले में मप्र के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, उनके ओएसडी ओपी शुक्ल, भाजपा नेता सुधीर शर्मा, राज्यपाल ओएसडी रहे धनंजय यादव, व्यापमं नियंत्रक रहे पंकज त्रिवेदी, कंप्यूटर एनालिस्ट नितिन महिंद्रा जेल जा चुके हैं। व्यापमं घोटाले में करीब ढाई हजार आरोपी हैं। इनमें से अबतक 21 सौ लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इस मामले से जुड़े 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
व्यापमं में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा सात जुलाई, 2013 को पहली बार पीएमटी परीक्षा के दौरान तब हुआ, जब एक गिरोह का भंडाफोड़ इंदौर की अपराध शाखा ने किया। पुलिस ने 20 ऐसे लोगों के खिलाफ मामला दायर किया। इन मामलों में परीक्षा देने वाले छात्र की जगह किसी और ने परीक्षा दी। इस मामले के मास्टर माइंड जगदीश सागर को पुलिस ने 16 जुलाई, 2013 को गिरफ्तार किया था। हाई कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेकर हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज चंद्रेश भूषण की अध्यक्षता में अप्रैल, 2014 में एसआईटी का गठन किया था। बाद में सीबीआई ने 15 जुलाई को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली।
बदल गया व्यापमं का नाम
व्यापमं का पुराना नाम व्यावसायिक परीक्षा मंडल था। इसे अब बदलकर प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड कर दिया गया है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी। इसे पहले प्री-मेडिकल टेस्ट बोर्ड के नाम से जाना जाता था। इसका गठन मेडिकल परीक्षाओं का आयोजन करने के लिए किया गया था।