गंजबासौदा क्षेत्र के समीप स्थित ग्राम हथोड़ा में गुरुवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां अज्ञात कारणों के चलते गेहूं की खड़ी फसल में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 15 बीघा जमीन में खड़ी फसल जलकर राख हो गई। इस घटना से क्षेत्र के कई किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, आग दोपहर के समय अचानक खेतों में भड़क उठी। शुरुआत में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण लपटें तेजी से फैलती चली गईं। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के खेतों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
इस आगजनी में कृषक प्राण सिंह, कल्याण सिंह, जालम सिंह, नारायण कुशवाहा और कैलाश सिंह की गेहूं की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। किसानों ने बताया कि फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी और कुछ ही दिनों में उन्हें इससे आमदनी होने वाली थी, लेकिन अचानक लगी आग ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकल की गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ग्रामीणों ने भी पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने में सहयोग किया। समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो सैकड़ों बीघा में खड़ी फसल जलकर खाक हो सकती थी, जिससे नुकसान और भी अधिक बढ़ जाता।
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मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित किसानों से बातचीत की। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि नुकसान का सर्वे कराया जाएगा और शासन की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में आग लगने के पीछे कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि तेज धूप और सूखी फसल के कारण हल्की चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, वहीं कुछ ने शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों की आशंका जताई है। फिलहाल प्रशासन द्वारा आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि फसल कटाई के समय इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए प्रशासन को सतर्कता बढ़ाने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।
फिलहाल आग बुझ चुकी है, लेकिन किसानों के चेहरों पर नुकसान की पीड़ा साफ देखी जा सकती है। वे अब शासन से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि किसी हद तक उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई हो सके।